‘फायदा उठाने वाले चूकते नहीं, चमचों की खूब गलती है दाल चुनाव में...’
साहित्य सभा की गोष्ठी में प्रस्तुत की साहित्यकारों ने रचनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
साहित्य सभा की मासिक गोष्ठी का आयोजन रविवार को आरकेएसडी कॉलेज में किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान के प्रो. अशोक कुमार अत्री ने की। गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए श्याम सुंदर ने नेताओं पर व्यंग्य करते हुए कहा कि आज के नेता पद की गरिमा भूल गए हैं।
महेश शर्मा व्यास ने कहा कि फायदा उठाने वाले चूकते नहीं, चमचों की खूब गलती दाल चुनाव में, ऊंच-नीच वाली भाषा चलती है चुनाव में। रिसाल जांगड़ा ने सियासत के बारे में कहा कि सियासत करे तमाशा देख, रोज छिड़े नया रासा देख। रविंद्र रवि ने गजल सुनाते हुए कहा कि ये भी गुना कर लूं क्या, दुश्मनों से सलाह कर लूं क्या? प्रद्युमन भल्ला, ईश्वर चंद गर्गदिनेश बंसल ने कहा कि उम्र भर याद आएगी ऐसी कहानी लिख गया, वो वतन के नाम पर अपनी जवानी लिख गया। सतबीर जागलान ने टीचर के बारे में कहा कि देते हमको अच्छा ज्ञान, भगत हम टीचर भगवान। दिलबाग सिंह ने कहा कि जवानी के चमक जाने लगी है, चेहरे पर झुरियां आने लगी हैं, लड़ते थे कभी बड़ी लड़ाइयां, अब तो दिल की धड़कन भी डराने लगी है। डॉ. हरीश चंद्र झंडई ने नन्हीं बच्ची पर कविता प्रस्तुत करते हुए कहा कि ये नन्हीं-नन्हीं कलियां, भाग्य की पहेलियां, छुपी हैं इनकी मुटठी में।
इस अवार पर प्रो. अमृत लाल मदान, शमशेर सिंह अत्रि, शमशेर सिंह कैंदल, रामफल गौड़, चतुर्भुज बंसल, प्रीतम, महेंद्रपाल, सुशील बिंदलिश, अमृतलाल मदान, संदीप, प्रद्युमन भल्ला, ईश्वर चंद गर्ग ने भी गोष्ठी में रचनाएं प्रस्तुत कीं।