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Kaithal News: बाबा राजपुरी मेले में 150 पुलिस कर्मचारी संभालेंगे सुरक्षा व्यवस्था

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। गांव बाबा लदाना स्थित ऐतिहासिक बाबा राजपुरी डेरे में मंगलवार से तीन दिवसीय मेला शुरू होगा। वार्षिक मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस और रोडवेज विभाग ने विशेष इंतजाम किए हैं। मेले की सुरक्षा के लिए करीब 150 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई है। गांव के चार प्रमुख प्रवेश मार्गों सहित पांच स्थानों पर नाकाबंदी रहेगी।
वहीं, श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी न हो, इसके लिए रोडवेज विभाग की पांच विशेष बसें चलेंगी। यात्रियों की संख्या के अनुसार बसों को रवाना किया जाएगा। रोडवेज ने कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाते हुए निरीक्षक रामफल शर्मा को व्यवस्थाओं का ओवरऑल इंचार्ज नियुक्त किया है। बाबा राजपुरी डेरे में हर वर्ष लगने वाले मेले में कैथल सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। डीएसपी सुशील प्रकाश ने बताया कि मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की योजना तैयार की है।
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श्रद्धालुओं की सेवा में पांच बसें चलेंगी : रोडवेज के जीएम कमलजीत सिंह ने बताया कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभाग ने पांच विशेष बसें चलाने का निर्णय लिया है। इन बसों को यात्रियों की संख्या के अनुसार भेजा जाएगा। श्रद्धालुओं को मेले तक पहुंचने और लौटने के दौरान बसों के लिए अधिक इंतजार न करना पड़े। बसों का संचालन सुचारु रखने के लिए कर्मचारियों की दिन और रात की शिफ्ट के अनुसार ड्यूटी लगाई है। इसके अलावा रोडवेज की जीप चेकिंग और कार चेकिंग टीमें भी बसों की जांच करेंगी।
550 वर्ष पुराना है बाबा राजपुरी डेरे का इतिहास : गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरे का इतिहास करीब 550 वर्ष पुराना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा राजपुरी का जन्म इसी गांव में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म की ओर था। उन्होंने गांव बात्ता में बाबा सरस्वती पुरी से शिक्षा और दीक्षा प्राप्त की थी। बाद में वह बाबा राजपुरी के नाम से प्रसिद्ध हुए। यह डेरा स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस के गुरु महंत तोतापुरी महाराज की तपोस्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है। डेरे में महंत तोतापुरी महाराज की समाधि स्थित है। यहां सैकड़ों वर्ष पुराना जाल का पेड़ भी है।
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बाबा राजपुरी को दूधाधारी बाबा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि डेरे में पूजा करने से पशुधन में वृद्धि होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इसी आस्था के कारण श्रद्धालु बाबा की समाधि पर दूध, घी, अनाज और प्रसाद चढ़ाते हैं। डेरे में दशहरा, एकादशी और द्वादशी पर तीन दिवसीय मेला आयोजित करने की परंपरा है। पहले दो दिन दूर-दराज से श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं जबकि तीसरे दिन आसपास के गांवों की महिलाएं विशेष रूप से पूजा करती हैं। मेले में भंडारे के साथ कुश्ती दंगल का भी आयोजन किया जाता है।
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