संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कैथल डिपो में 31 मार्च को 13 बसें कंडम हो जाएगी। इसके बाद डिपो में बसों की बसों की संख्या घटकर 156 हो जाएगी। जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना कर पड़ेगा। ऐसे में लंबे व अन्य ग्रामीण रूट भी प्रभावित हो सकते हैं।
गौरतलब है कि पिछले मार्च में डिपो को आठ नई बीएस तकनीक की बसें मिली थी, लेकिन गत माह नवंबर में कुछेक बसें दिल्ली एनसीआर भेजी गई थी ये बसें वापस कैथल डिपो में नहीं आई। बीएस-छह तकनीक वाली 48 नई बसाें को रोहतक, जींद व भिवानी डिपो में भेज दिया था जबकि उनकी जगह खटारा बसें कुरुक्षेत्र डिपो के लिए भेजी गई थी।
आंकड़ों के अनुसार, कैथल डिपो में इस समय में कुल 179 बसें हैं। इनमें बीएस-छह तकनीक इंजन वाली 31 बसें हैं। पांच मिनी पिंक बसों समेत बीएस-तीन तकनीक और बीएस- चार तकनीक की बसें शामिल हैं। वहीं किलाेमीटर योजना की 23 बसें अलग से सेवाएं दे रही हैं। अब इन बसों में कमी होने के चलते ये खराब हो जाएगी।
करीब 25 हजार यात्री करते है रोडवेज की बसों में सफर ः कैथल डिपो से चलने वाली रोडवेज की बसों में 18 से 20 हजार यात्री सफर तय करते हैं। बसों से करीब 15 लाख रुपये प्रतिदिन आमदनी होती है। इस समय डिपो में परिचालक 295 व चालक 248 है। जो रूटों पर चल रहे हैं। बता दें कि कंडम बसों की संख्या बढ़ने के बाद जींद, राजौंद, कुरुक्षेत्र, गुहला, असंध, करनाल सहित अन्य सैकंडों रूटों पर चलने वाले यात्रियों के लिए कठिनाई होगी।
नई बसों की है जरूरत
रोडवेज विभाग को नई बसों की जरूरत है। जितनी बसें कंडम हुई है। उनकी जगह सरकार को नई बसें खरीदनी चाहिए। पुरानी बसें बीच रास्ते में खराब हो जाती है। इससे चालक व परिचालक को भी दिक्कत आती है। रूट भी प्रभावित हो जाता है।
-बलवान सिंह कुंडू, रोडवेज कर्मचारी नेता।
नई बसों की है जरूरत
रोडवेज डिपो कैथल से 13 बसें कंडम हो गई है। निदेशालय को 50 बसों की मांग भेजी हुई है। इनमें कुछ बसें एसी, कुछ नार्मल बसें है। यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। उम्मीद है कि मांग को जल्द पूरा किया जाएगा और बसें जल्द दी जाएंगी। -अनिल, कार्यशाला प्रबंधक, कैथल डिपो।