संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गलत ट्रेडिंग के कारण करीब सवा करोड़ की चपत लगने के बाद युवक ने फंदा लगाकर जान दे दी। परिजनों ने जब मोबाइल की जांच की तो मामले का खुलासा हुआ। मोबाइल में मिले एक पत्र में युवक ने चार लोगों को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही मम्मी-पापा से आरोपियों को सबक सिखाने की बात कही है। मामले में परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वार्ड नंबर-13 कलायत निवासी रोशनी देवी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका बेटा अंशुल गुप्ता-30 अविवाहित था। उसने एचडीएफसी बैंक कलायत के पास किसान सेवा केंद्र के नाम से पेस्टीसाइड दवाइयों की दुकान खोली थी। दुर्गा मार्केट के पास अपने पुराने मकान को छोड़कर हाल ही उसने नए मकान में शिफ्ट किया था। शनिवार को दोपहर वह नए मकान पर ही थी। तभी सूचना मिली कि अंशुल ने दुर्गा मार्केट के पास बने पुराने मकान में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। वह अपने परिवार व पड़ोसियों के साथ पुराने मकान में पहुंची, जहां बेटा अंशुल फंदे पर लटका हुआ था। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल की तो मौके पर सुसाइड नोट मिला। इसमें अंशुल ने आत्महत्या की बात लिखी थी, लेकिन किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया था। इसके बाद जब परिजनों ने अंशुल के मोबाइल का लॉक खोलकर व्हाट्सएप चैटिंग पढ़ी और रिकॉर्डिंग सुनी तो आत्महत्या के कारणों का खुलासा हुआ। परिजनों को मोबाइल पर अंशुल का लिखा एक पत्र भी मिला, जिसमें अंशुल ने लिखा है कि मेरी मौत का कारण चार लोग हैं।
उन्होंने आज मेरे 24.20 लाख रुपये खाए हैं। पहले भी ये लोग मुझसे एक करोड़ रुपये धोखे से ले चुके हैं। दूसरे पेज पर लिखा था कि ये लोग दो नंबर में ट्रेडिंग करवाते हैं और लोगों से धोखाधड़ी कर उनके पैसे खा जाते हैं। मैने इनकी गलती पकड़ी तो उल्टा मुझे ही गलत साबित करने लगे। मैं तो अपनी जिंदगी समाप्त कर रहा हूं, परंतु मम्मी पापा जी आप इनको पूरा सबक सिखा देना। आरोपियों के मोबाइल नंबरों पर अंशुल के साथ कई संदिग्ध चैटिंग भी बताई जा रही है।
परिजनों के अनुसार, आरोपियों में बैंककर्मी भी शामिल हैं, जिसने अंशुल को बहकाकर धोखे से लोन करवा रजिस्ट्री अपने पास गिरवी रख ली, जबकि रजिस्ट्री उसके नाम है पर उसके खाते में लोन के नाम का कोई रुपया नहीं आया। बैक कर्मियों की भी संदिग्ध रिकॉर्डिंग अंशुल के मोबाइल में है। पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर मोबाइल नंबरों की जांच की जा रही है।