काला तेला बीमारी से धान की फसल हो रही बर्बाद
दवाओं के निष्प्रभावी होने के कारण सकते हैं किसान
फोटो संख्या-23
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। धान की फसल में काले तेला के भयंकर प्रकोप ने किसान को खून के आंसू रुला दिया है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए किसान विभिन्न दवाओं का स्प्रे कर रहे हैं पर किसी भी दवा के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे। काले तेला के कारण धान की खड़ी फसल सूख जाती है। यह खतरनाक कीट देखते ही देखते फसल को तबाह करके रख देता है। किसान सतीश राणा, चंद्र सिंह, पप्पू, बाज सिंह, अनिल राणा, बबलू राणा का कहना है कि काले तेला के कारण उनकी धान की फसल बर्बाद हो रही है। विभाग द्वारा सुझाई गई दवाओं का प्रयोग करके देख लिया पर इस बीमारी पर किसी भी दवा का कंट्रोल नही आ रहा। किसानों का कहना है कि हर रोज वे दवा का स्प्रे करते हैं उसके बावजूद भी तेला रुकने का नाम ही नही ले पा रहा।
कृषि उप-निदेशक डा. महावीर सिंह ने कहा कि शुरूआत के दौर में यदि निम्फ का कंट्रोल कर लिया जाए तो एडल्ट तेला को काबू पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस समय जो मौसम चल रहा है वह काले तेला के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। कोई भी कीट तभी स्वच्छंद होता है जब मौसम उसके पनपने के लिए अनुकूल हो। किसान लगातार नुवान, बुरफो तथा क्लोरो नामक दवाओं को मिला कर स्प्रे करते रहें।