संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के ग्रीन जोन में घोषित हुए गांवों में भी अब फसल अवशेष तेजी से जलाए जा रहे हैं। इस कारण अब पिछले वर्ष ग्रीन जोन घोषित हुए गांव येलो जोन में आ रहे हैं। इसका कारण यह है कि जिले में ग्रीन जोन में घोषित गांवों में भी लगातार फसल अवशेष जलाए जा रहे हैं। यहां पर भी लगातार फसल अवशेषों में आग लगाने के मामले बढ़े हैं।
रविवार को कैथल का देश में सबसे अधिक एक्यूआई 380 रहा था। मंगलवार को तीसरे दिन भी यह एक्यूआई अधिक कम नहीं हो पाया है। मंगलवार को जिले का एक्यूआई 356 रहा जबकि यह सोमवार को 342 था।
गौरतलब है कि पिछले दिनों के आंकड़ों के अनुसार, कैथल का नाम देश में टॉप टेन प्रदूषित शहरों में शामिल है। ऐसे में दीपावली से पहले वायु प्रदूषण में कमी आने की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में 283 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें चार लाख 90 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा चुका है। जिला प्रशासन के आदेशों पर फसल अवशेष जलाने पर मामला दर्ज करने की कार्रवाई भी जारी है। अब तक 53 मामले किसानों पर दर्ज हो चुके हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन के जिला संयोजक व जिला सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि जिले में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर लगातार कार्य किया जा रहा है। जहां पर किसान खेतों में फसल अवशेषों में आग लगाते हैं। वहां पर विभाग उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई भी कर रहा है। इसके तहत जिला प्रशासन के आदेशों पर लोकेशन के आधार पर मामले भी दर्ज करवाएं जा रहे हैं।
ग्रीन जोन में शामिल इन गांवों में जलाया जा रहा फसल अवशेष
खंड गांव
गुहला व सीवन दुसेरपुर, उमेदपुर, कवारतन
कलायत और राजौंद खेड़ी शेरू, चौशाला, ब्राहम्णीवाला, कुकरकंडा
पूंडरी सांच
कैथल पट्टी अफगान, पट्टी खोत, नैना धौंस