संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के नागरिक अस्पताल में पिछले कुछ महीनों से तनाव और मानसिक परेशानियों के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। रोजाना लगभग 10 से 12 युवा मानसिक तनाव, अवसाद या बेचैनी जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुँच रहे हैं। इनमें ज्यादातर कॉलेज जाने वाले छात्र, नौकरीपेशा युवा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी शामिल हैं।
अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. विवेक गर्ग ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं पर काम, पढ़ाई और कॅरियर का दबाव बहुत बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करना, नींद की कमी और अस्वस्थ जीवनशैली भी तनाव को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। कई बार युवा अपने मन की बातें किसी से साझा नहीं करते, जिससे चिंता और घुटन बढ़ती है और यह स्थिति आगे चलकर अवसाद में बदल सकती है।
तनाव के कारण युवाओं में चिड़चिड़ापन, आत्मविश्वास की कमी, अकेले रहने की इच्छा और नींद की समस्याएं आम हो गई हैं। कुछ मामलों में तो मरीजों के मन में आत्मघाती विचार तक आने लगते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि परिवार और दोस्तों को इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए ताकि समय रहते मदद मिल सके। पढ़ाई और कॅरिअर का दबाव युवाओं को हर दिन तनाव की ओर धकेल रहा है। कई बार युवा किसी भी क्षेत्र में असफलता को बर्दाश्त नहीं कर पाते, जिससे तनाव और घेर लेता है।
डॉ. विवेक गर्ग ने तनाव से निपटने के उपाय बताते हुए कहा कि योग, ध्यान, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार बहुत जरूरी हैं। हर व्यक्ति को दिन में कुछ समय अपने मानसिक शांति के लिए निकालना चाहिए। परिवार को भी युवाओं की बात ध्यान से सुननी चाहिए, न कि उन्हें जज करना चाहिए।
डॉ. गर्ग ने चेताया कि मानसिक स्वास्थ्य को समाज में अब भी उतना गंभीरता से नहीं लिया जाता जितना शारीरिक स्वास्थ्य को लिया जाता है। उन्होंने अपील की कि अगर किसी को लगातार चिंता, उदासी या बेचैनी महसूस हो रही है, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें।