पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार ज्योति मल्होत्रा की जमानत पर बुधवार को सुनवाई हुई। दोनाें पक्षों को सुनने के बाद सिविल जज सुनील कुमार ने जमानत याचिका खारिज कर दी है।
मंगलवार को ज्योति मल्होत्रा के वकील कुमार मुकेश ने सिविल जज सुनील कुमार की अदालत में याचिका दायर की थी। जिस पर अदालत ने सुनवाई करते हुए पुलिस से बुधवार को उनका जवाब मांगा था। बुधवार को पुलिस ने सरकारी वकील के जरिए अपना पक्ष रखा। पुलिस ने कहा कि ज्योति साल 2025 तक पाकिस्तान के पीओआई के संपर्क में थी। इस कारण उस पर बीएनएस की धारा-152 के तहत केस बनता है।
ज्योति के वकील की दलील
एडवोकेट कुमार मुकेश ने कहा कि मैंने ज्योति के केस में अदालत के जरिए पुलिस से अब तक की जांच का ब्योरा लिया है। मुझे जो दस्तावेज मिले उसमें पुलिस के पास ऐसा कोई कंकरीट सबूत नहीं है। ज्योति के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भी ज्योति को ही आधार बनाया गया है। एफआईआर में हर स्थान पर यही लिखा गया है कि ज्योति ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तान का वीजा लिया, ज्योति ने बताया कि उसके दानिश के साथ संपर्क हैं। भारतीय संविधान के अनुसार हर एक नागरिक के पास यह अधिकार है कि पुलिस व्यक्ति को उसी के खिलाफ आरोपी नहीं बना सकती। ज्योति के खिलाफ दर्ज एफआईआर ही कानूनी तौर पर गलत हैं। पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी प्रेस बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि ज्योति की सैन्य या संवेदनशील जानकारी तक पहुंच नहीं थी। ऐसे में ज्योति के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का केस नहीं बनता।