संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिले में लिंगानुपात सुधार को लेकर प्रशासन ने अवैध गर्भपात और भ्रूण लिंग जांच के मामलों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली ने बताया कि 304 गांवों को लिंगानुपात के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 109 गांवों में 1000 के मुकाबले 850 से भी कम लड़कियां पैदा हुईं हैं जो चिंता का विषय हैं।
उन्होंने बताया कि 109 गांव रेड जोन (लिंगानुपात 850 से कम), 30 गांव येलो जोन (850 से 900) और 165 गांव ग्रीन जोन (900 से ऊपर) में चिह्नित किया है। रेड जोन गांवों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
मंगलवार को लघु सचिवालय में जिला स्टैंडिंग कमेटी की बैठक हुई। इसमें अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए। सीएमओ डॉ. सुमन कोहली ने बताया कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के मूलभूत ढांचे को मजबूत करना और आमजन तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है।
डिप्टी सीएमओ पालेराम कटारिया ने बताया कि लिंगानुपात सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम 1994 के तहत लिंग जांच कराने या कराने में सहयोग देने पर तीन वर्ष की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
गर्भवती महिलाओं का रिकॉर्ड ग्राम स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध रहता है। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। बैठक में पुलिस विभाग से अवैध गर्भपात और लिंग जांच में संलिप्त लोगों पर कड़ी नजर रखने की अपील की गई जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जमीनी स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी सीमा रोहिल्ला, ड्रग कंट्रोल ऑफिसर गीता, रूबी शर्मा मौजूद रही।