13जेएनडी19-नागरिक अस्पताल में रक्तदान करते हुए सुभाष ढिगाना। स्रोत स्वयं
जींद। 24 साल पहले फुफेरे भाई की पीलिया के कारण खून की कमी से मौत हो गई। हालांकि उसे बचाने के लिए खून भी दिया, लेकिन उस बचाया नहीं जा सका।
इस घटना से सबक लेते हुए 22 साल पहले ढिगाना गांव के सुभाष ने ठाना कि वह सड़क दुर्घटना या बीमारी के कारण किसी मरीज की खून की कमी से जान नहीं जाने देंगे। इसको लेकर उन्होंने हर महीने रक्तदान शिविर लगाने शुरू कर दिए। अब वह जरूरतमंदों की पूर्ति के लिए हर महीने तीन रक्तदान शिविर लगाते हैं।
जब भी जींद के नागरिक अस्पताल की ब्लड बैंक में यूनिट (खून) की मांग बढ़ती है तो शिविर लगवाकर पूर्ति कर देते हैं। सुभाष ढिगाना अब तक 791 रक्तदान शिविर लगवा चुके हैं। शनिवार को विश्व रक्तदाता दिवस पर 791वां रक्तदान शिविर लगाएंगे।
वह खुद 49 बार खून दे चुके हैं और उनकी पत्नी मंजू ढिगाना भी 18 बार रक्तदान कर चुकी हैं। दंपती समाजसेवा में अक्सर अगली पंक्ति में खड़ा मिलता है।
समाजसेवा में ही उन्हें राष्ट्रीय युवा पुरस्कार मिल चुका है। करीब 15 साल पहले जींद के तत्कालीन डीसी युद्धवीर ख्यालिया ने भी सुभाष ढिगाना की इस मुहिम में काफी सहयोग किया था।
उन्होंने जिले में लगने वाले रक्तदान शिविरों का सुभाष को नोडल अधिकारी नियुक्त किया था। जिला प्रशासन की तरफ से उस समय 7 महीने तो प्रतिदिन शिविर लगाए गए थे।
उनकी उपलब्धि पर कई बार इन्हें सम्मानित भी किया गया।