संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की मनमानी, ऊंची ब्याज दरों और महिलाओं के शोषण के खिलाफ जनवादी महिला समिति ने डीसी ऑफिस के बाहर धरना दिया। इस दौरान समिति ने सीटीएम मोनिका के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में समिति ने महिलाओं का कर्ज माफ करने, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की लूट पर रोक लगाने, केरल के कुदुम्बश्री मॉडल की तर्ज पर स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने, ब्याज दर 12 प्रतिशत वार्षिक से अधिक न रखने व सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ाने की मांग की गई।
मुख्य वक्ता राज्य अध्यक्ष सविता ने कहा कि प्रदेश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से से आम जनता का बुरा हाल है। सरकारी बैंकों से बिना गारंटी कर्ज मिलना कठिन हो गया है। इस कारण बड़ी संख्या में महिलाएं माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के जाल में फंस रही हैं। माइक्रोफाइनेंस कंपनियां मनमाना ब्याज वसूल रही हैं।
जिला कोषाध्यक्ष नूतन प्रकाश ने कहा कि सरकार ने इन कंपनियों को खुली छूट दे रखी है और ब्याज दर की ऊपरी सीमा हटाने से महिलाओं पर कर्ज का बोझ कई गुना बढ़ गया है। सरकारी बैंक जहां आम महिलाओं को बिना गारंटी कर्ज देने से कतराते हैं। धरने की अध्यक्षता समिति की जिला अध्यक्ष आशा रानी ने की, जबकि संचालन जिला सचिव कोशिगन ने किया। इस अवसर पर सीता, सुशीला, बिमला, रीना, मूर्ति, पवन कुमार, कपूर सिंह मौजूद रहे।