जींद। जिले में दस वर्ष पहले वॉलीबाल का कोई महिला खिलाड़ी नाम से भी नहीं जानती थी, लेकिन कोच मियां सिंह के मन में जनून था कि वह क्षेत्र में लड़कियों को भी आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने
उचाना में ही लड़कियों को वॉलीवाल का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में कोई भी लड़की आगे आने को तैयार नहीं थी, जिसके बाद भी उसने स्कूल व गांवों में जाकर लड़कियों को इस खेल के लिए प्रेरित किया और वह अपने मिशन में सफल हुए। आज अब उनके द्वारा प्रशिक्षित खिलाड़ियों के पदक जीतने की झडी लगाई हुई है।
कोच मियां सिंह वर्ष 2010 में हिसार में डीपी के पद पर नियुक्त थे। इस दौरान उनके मन में हिसार ही नहीं बल्कि अपने क्षेत्र में भी वॉलीबाल के खिलाड़ी तैयार करने की इच्छा हुई। इस दौरान उनके सामने बड़ी परेशानी यह थी कि उनको हिसार से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए प्रतिदिन उचाना आना और जाना पड़ता था। पहले दो वर्ष में बड़ी मुश्किल से पांच ही लड़कियां इसे सीखने को आगे आईं। इसके बाद वह डीपी के पद से रिटायर्ड हो गए और पूरा ध्यान वॉलीबाल की तरफ लगा दिया । क्षेत्र की लड़कियों को इस खेल के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद खिलाड़ियों की संख्या मैदान में पूरी हुई तो उनकी टीम ने जिला और राज्य स्तर पर मेडल प्राप्त किए। जिससे उनका हौंसला बढ़ा तो फिर लगातार खिलाड़ियों की संख्या बढ़ती गई। उनके द्वारा अब तक 50 से ज्यादा ऐसे खिलाड़ी तैयार किए गए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर तक खेलकर पदक जीते।
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20 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर जीते पदक
कोच मियां सिंह ने बताया कि उनके द्वारा प्रशिक्षित 20 ऐसी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने यूथ नेशनल टीम में भाग लेकर पदक प्राप्त किए। इसके अलावा दो लड़कियों का चयन इंडिया कैंप में हुआ तो तीन लड़कियां खेलो इंडिया में भी चयनित हुई हैं।
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नौकरी भी लग चुकी है
मियां सिंह का दावा है किदस से ज्यादा लड़कियां सीआरपीएफ, एसएसबी, पुलिस में नौकरी लगी हैं,जबकि दो लड़कियां वालीबाल की कोच लगी हैं। इन लड़कियों से प्रेरणा लेकर अब क्षेत्र की लड़कियां लगातार इस खेल के लिए प्रशिक्षण ले रही हैं।