19जेएनडी05 : लघु सचिवालय के सामने लगा शकरकंदी और झाड़ियों के बेर का ठेला। संवाद
जींद। जैसे ही सर्दी अपनी दस्तक दे रही है, बाजारों में मौसमी देसी स्वादों की रौनक भी बढ़ती जा रही है। शकरकंदी और झाड़ियों के बेर की मांग में इस हद तक उछाल देखा जा रहा है कि सुबह-शाम दोनों समय दुकानों और ठेलों पर खरीदारों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। गोहाना रोड, रुपया चौक, सब्जी मंडी और गलियों में ठेले वाले आते हैं।
शकरकंदी को देखकर आते-जाते लोगों का मन होत है कि एक प्लेट बनवा लेते है। उनका कहना है कि सर्दियों में शकरकंदी न केवल स्वाद बढ़ाती है बल्कि शरीर को ऊर्जा और गर्माहट भी देती है, इसी वजह से लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
बेर भी सर्दियों में ज्यादा खाए जाते है। देहाती स्वाद के शौकीन लोग इन बेरों का स्वाद लेने के लिए बेर वाली रेहड़ी पर नजर आते हैं। गांवों के आसपास उगने वाले ये बेर अपने खट्टे-मीठे स्वाद और प्राकृतिक ताजगी के कारण खूब पसंद किए जा रहे हैं।
शाम के समय लोग बच्चों के साथ बाहर निकलकर शकरकंदी का स्वाद लेते दिखाई देते हैं, वहीं कई युवा चलते-फिरते बेर खरीदकर चखते नजर आते हैं। सर्दी में शकरकंदी और झाड़ियों के बेर न केवल मौसम का स्वाद बढ़ा रहे हैं बल्कि लोगों को एक बार फिर देसी पारंपरिक खानपान की ओर लौटने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।
खूब भा रहा शकरकंदी का स्वाद
हॉट डॉग, टिकी की बजाय लोग शकरकंदी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। पॉपकोर्न की जगह पर युवा अब झाड़ियों के बेर को खरीद रहे हैं। कॉलेज, विश्वविद्यालयों और निजी संस्थानों के बाहर ठेले वाले खड़े रहते हैं और फिर बेर या शकरकंदी का आनंद लेते हैं।