जींद। बड़ौदी गांव में जलघर निर्माण का मामला अभी अधर में लटका हुआ है। 480 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले जलघर की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) मुख्यालय भेजी गई है लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली है। अभी तक शहर के करीब दो लाख लोगों को ट्यूबवेल के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। भूजल में कहीं टीडीएस (टोटल डिजाल्ब सालिड्स) एक हजार तो कहीं दो हजार है जो सेहत के लिए खतरनाक है। जलघर से नहरी पानी मिलने पर लोगों को टीडीएस युक्त पानी से निजात मिलेगी।
शहर के लोगों को चार साल बाद भी पीने के लिए नहरी पानी नहीं मिल पाया है। बड़ौदी गांव में जलघर के लिए 46 एकड़ में से 36 एकड़ जमीन जनस्वास्थ्य विभाग के नाम हो चुकी है लेकिन अभी 10 एकड़ जमीन मिल सकी है। किसान इस जमीन का अधिक दाम मांग रहे हैं। जनस्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जमीन का मामला जल्द सुलझा लिया जाएगा। जलघर प्रोजेक्ट की डीपीआर भी मुख्यालय भेजी गई है। मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू होने की उम्मीद है। पूरे प्रोजेक्ट पर 480 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अगले साल शहर के लोगों को पीने के लिए नहरी पानी मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने वैसे तो 2016 में शहर के लोगों को पेयजल के लिए नहरी पानी उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। उसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने जींद में शहर के बीच से गुजर रही हांसी ब्रांच नहर से पानी उपलब्ध करवाने की योजना बनाई लेकिन यह नहर पूरे वर्ष नहीं चलने के कारण योजना लटक गई। इसके बाद नरवाना के पास से गुजर रही सिरसा ब्रांच नहर (जोकि पूरे वर्ष चलती है) से पेयजल उपलब्ध करवाने की योजना बनाई। इसके लिए 2018 में जनस्वास्थ्य विभाग ने बड़ौदी गांव के पास जमीन देखी। यहां 46 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की बात हुई लेकिन 36 एकड़ जमीन ही जनस्वास्थ्य विभाग के नाम की गई। 10 एकड़ जमीन के मालिक किसानों ने सड़क के साथ लगती जमीन का अधिक रेट मांगा। पहले 36 एकड़ जमीन 42 लाख रुपये प्रति एकड़ जनस्वास्थ्य विभाग ने खरीदी थी। 10 एकड़ जमीन के मालिक 55 से 60 लाख रुपये प्रति एकड़ मांग रहे हैं। अब इस 10 एकड़ जमीन को अधिक रेट में खरीदने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने मंजूरी मांगी है। वहीं 36 एकड़ जमीन की जनस्वास्थ्य विभाग ने बाड़बंदी करवा दी है। इस प्रोजेक्ट की डीपीआर को मुख्यालय अगले सप्ताह मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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पाइपलाइन के जरिये नरवाना से बड़ौदी गांव पहुंचेगा पानी
नरवाना के पास से गुजर रही सिरसा ब्रांच नहर का पानी लगभग 45 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन दबाकर बड़ौदी गांव में बनने वाले जलघर तक लाया जाएगा। इसके बाद शहर में अलग-अलग जगह 24 बूस्टर बनाए जाएंगे ताकि पूरे शहर में प्रेशर के माध्यम से पानी पहुंचा जाए। बड़ौदी से पाइप लाइन के जरिए इन बूस्टिंग स्टेशन तक पानी लाया जाएगा और आगे घरों में सप्लाई किया जाएगा।
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भूमिगत पानी का टीडीएस अधिक
शहर में भूमिगत पानी में टीडीएस की मात्रा दो हजार से भी ज्यादा है। हुडा सेक्टरों और अर्बन एस्टेट को छोड़ दें तो बाकी शहरवासियों को भूजल की आपूर्ति की जाती है। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में विभिन्न जगहों पर करीब 52 सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगाए गए हैं, जिनसे आधे से ज्यादा शहर में पानी की सप्लाई की जाती है। हांसी ब्रांच नहर के आसपास लगे ट्यूबवेलों में बेशक टीडीएस एक हजार के आसपास है लेकिन गोहाना रोड, नया बस अड्डा की साइड भूमिगत पानी में टीडीएस की मात्रा दो हजार से भी ज्यादा है, जो सेहत के लिए खतरनाक है।
वर्जन
डीपीआर तैयार करके मुख्यालय भेजी गई है, जल्द ही मंजूरी मिलने के बाद टेंडर लगाकर काम शुरू करवाया जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट पर 480 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 36 एकड़ जमीन जनस्वास्थ्य विभाग के नाम हो चुकी है, 10 एकड़ भी जल्द ही नाम हो जाएगी। उम्मीद है अगले वर्ष से शहर के लोगों को स्वच्छ पेयजल मिलने लगेगा।-दलबीर दलाल, कार्यकारी अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग
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09जेएनडी26 : गांव बड़ौदी में जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा अधिगृहित की गई जमीन। संवाद।