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Jind News: बधाना गांव में 35 साल पहले बने पानी के टैंक सूखे, हालत जर्जर

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03जेएनडी22 : समाजसेवी नरेश कुमार। संवाद
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अलेवा। बधाना गांव में जलापूर्ति विभाग द्वारा बनाए गए टैंक को लगभग 35 वर्ष हो चुके हैं और टैंक में रिसाव होने शुरू हो गए हैं। इसके बावजूद आज तक पूरे गांव को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति नहीं मिल सकी है। पिछली सरकार के कार्यकाल में भी लगभग एक करोड़ रुपये की राशि जलापूर्ति केंद्र के लिए मिली थी, लेकिन इसके बावजूद स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा।
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गांव बधाना में जल संग्रह के लिए दो टैंक बनाए गए हैं। 35 साल पहले बने यह जलघर अब जर्जर हो चुके हैं। नहर का पानी केवल एक सप्ताह ही मिल पाता है। ऐसे में यह दोनों जलघर पानी से भर नहीं पाते हैं। ग्रामीणों को भी यह पानी केवल एक सप्ताह ही मिलता है। इसके बाद जलघर के टैंक पानी से खाली हो जाते हैं। एक तो गांव में पानी के अवैध कनेक्शन हैं, जो खाली चलते रहते हैं। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा पाइपलाइन बिछाकर लोगों को पानी दिया गया है, जिस कारण पुरानी बस्तियों में तो आज तक पानी पहुंच ही नहीं पाया है। इन बस्तियों के लोगों का दूसरी बस्तियों से पानी भरकर लाना पड़ता है। इसके अलावा सबमर्सिबल का पानी पीने में अच्छा नहीं है। इसमें टीडीएस की मात्रा अधिक है। एक सप्ताह नहरी पानी पीकर लोग फिर सबमर्सिबल के पानी पर आधारित रहते हैं।
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साथ लगते गांवों में नहरी पेयजल
पूर्व सरपंच रामफल ने कहा कि उनके गांव के साथ लगते धनखेड़ी व कुचराना गांव में नहरी पानी आधारित पेयजल मिलता है। इन गांवों में नरवाना से गुजर रही भाखड़ा नहर से पानी आता है, जो कभी बंद नहीं होती। जनप्रतिनिधियों के दोगलेपन के कारण उनको पानी नहीं मिल पाता। उनके गांव में भी जलघरों में इसी नहर से पानी की सप्लाई दी जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा।
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सफाई का नहीं ध्यान
समाजसेवी नरेश कुमार ने कहा कि जलघर के अंदर घास के साथ-साथ अन्य खरपतवार भी उगे हुए हैं। जलघर की यह भूमि किसी चारागाह जैसी दिखाई देती है। इस जलघर पर कई बार पैसे खर्च किए गए, लेकिन पीने के पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई। यहां न तो सफाई है और न ही पानी। इसलिए भाखड़ा नहर से पीने के पानी की सप्लाई दी जाए, ताकि लोगों को हमेशा स्वच्छ पेयजल मिलता रहे।
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यहां पर बड़ी मोटर लगाने के लिए एस्टीमेट भेजा गया है, ताकि पानी के टैंकों को तुरंत भरा जा सके। जल्द ही बजट मिल जाएगा और यहां बड़ी मोटर लगाकर ज्यादा पानी का स्टोर किया जा सकेगा।
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-रणबीर सिंह, एसडीओ, जलापूर्ति विभाग, जींद

03जेएनडी22 : समाजसेवी नरेश कुमार। संवाद

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