दो महीने बाद पहली बार रविवार को नागरिक अस्पताल के मुख्य गेट के सामने सब कुछ शांत नजर आया। अप्रैल की शुरुआत में कोरोना संक्रमण ने रफ्तार पकड़ तो अस्पताल में मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों की भी भीड़ लगने लगी। अस्पताल में 22 अप्रैल तक 176 मरीज दाखिल हो गए थे। अब अस्पताल में केवल 55 मरीज ही इलाज करवा रहे हैं।
इस समय नागरिक अस्पताल में केवल कोरोना संक्रमित लोग ही दाखिल हैं। वहीं कुछ गर्भवती महिलाएं हैं। अन्य बीमारियों से पीड़ित कोई भी मरीज अस्पताल में दाखिल नहीं है। कोरोना संक्रमण से पहले अन्य बीमारियों से या किसी बीमार से निजात के लिए ऑपरेशन करवाने वाले औसतन 50 से 55 मरीज नागरिक अस्पताल में होते थे। इस समय भी अस्पताल में 55 मरीज ही दाखिल हैं। मई महीने की शुुरुआत से लेकर 20 मई तक अस्पताल में पांव रखने के लिए जगह नहीं थी। इमरजेंसी वार्ड के बाहर ही काफी संख्या में लोग अपनी चारपाई लेकर इलाज ले रहे थे। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने राजकीय कॉलेज में अस्थायी आइसोलेशन वार्ड बनाया तो इमरजेंसी वार्ड के बाहर बैठे सभी मरीजों को उसमें दाखिल कर दिया गया। अब धीरे-धीरे संक्रमण कम हुआ तो अस्पताल प्रशासन ने राजकीय कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड को भी बंद कर दिया। नागरिक अस्पताल में भी इस समय 70 बेड खाली हो चुके हैं।
28 अप्रैल से 20 मई तक नागरिक अस्पताल में लोगों की काफी भीड़ रही। यहां मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदार भी काफी संख्या में आ रहे थे। अस्पताल में 176 मरीज काफी दिनों तक भर्ती रहे। इनमें कुछ की छुट्टी होती तो कुछ नए आ जाते। अब संक्रमण कम होने से अस्पताल में लगभग 70 बेड खाली हुए हैं। काफी दिनों बाद अस्पताल आम दिनों की तरह लगने लगा है।
डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।