मांगों को लेकर नारेबाजी करते बैंक कर्मचारी। संवाद
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बैंकों के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने लगातार मंगलवार को दूसरे दिन भी हड़ताल की। इससे 13 सरकारी बैंकों की 154 शाखाओं के 1084 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। मंगलवार को हुई हड़ताल के चलते लगातार चौथे दिन बैंक बंद रहे। इससे लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। इससे पहले शनिवार व रविवार की छुट्टी थी, जबकि सोमवार को भी बैंक कर्मी हड़ताल पर रहे। जिले में एक दिन में सरकारी बैंकों में करीब 100 करोड़ रुपये का लेनदेन होता है। दो दिन की हड़ताल से 200 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है।
मंगलवार को सभी सरकारी बैंकों के कर्मचारी पंजाब नेशनल बैंक के बाहर एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गोहाना रोड पर लघु सचिवालय तक रोष प्रदर्शन किया। बैंक कर्मियों की दो दिन की हड़ताल के कारण उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हुई। कई सरकारी बैंकों के एटीएम में भी नकदी खत्म हो चुकी है। चार दिन के बाद बुधवार को बैंक कर्मचारी काम पर लौटेंगे। ऐसे में बैंकों में मारामारी रहेगी।
सफीदों गेट स्थित एसबीआई शाखा में ट्रेजरी बनाई जाती है। जहां से न केवल सरकारी लेनदेन होता है, बल्कि हजारों की संख्या में उपभोक्ता भी जुड़े हुए हैं। बैंक कर्मियों की हड़ताल के चलते उपभोक्ता दिनभर इधर-उधर भटकते रहे। ऑल इंडिया पीएनबी ऑफिसर एसोसिएशन के सर्कल सचिव जगदीश रेढू और पीएनबी हरियाणा स्टाफ एसोसिएशन ऑर्गेनाइजेशन सचिव दलवीर सिंह ने कहा कि बैंक प्रबंधन कर्मचारियों का शोषण कर रहा है। धीरे-धीरे बैंकों को निजीकरण की तरफ धकेला जा रहा है। केंद्र सरकार को चाहिए कि कर्मचारियों की मांगों को पूरा करे और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाए। बैंकों के निजीकरण किए जाने के चलते मजबूरन हड़ताल का निर्णय लिया गया है। पिछले दो दिन से बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं, पर बैंक प्रबंधन उनसे बात नहीं कर रहा है।
आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाएंगे बैंक
बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने के बाद विकास की गति तेज हुई थी। आम आदमी सरकारी बैंकों से जुड़ा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधा हुआ, लेकिन सरकार की नीतियों के चलते फिर से बैंकों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। इससे जहां लोगों को बैंकों पर विश्वास कम होगा, वहीं बैंक भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएंगे।
दलवीर सिंह, सचिव, पीएनबी हरियाणा स्टाफ एसोसिएशन ऑर्गेनाइजेशन