जींद। नागरिक अस्पताल में मॉक ड्रिल के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं को एडीसी ने जांचा। इस दौरान चिकित्सक मरीजों का इंतजार करते पाए गए, जबकि यहां उपचार के लिए आए मरीजों को जरा सी गंभीरता पर पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया जाता है। मॉक ड्रिल को देखने आए एडीसी विवेक आर्य को अस्पताल में बेहतरीन व्यवस्थाएं दिखाने का प्रयास किया गया, जबकि अस्पताल में पिछले एक साल से ऑक्सीजन प्लांट खराब है। इसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं गया।
मॉक ड्रिल वीरवार सुबह एडीसी विवेक आर्य के आने के बाद शुरू हुई। मॉक ड्रिल में एक के बाद एक एंबुलेंस आती हैं और मरीजों को तुरंत स्ट्रेचर से उपचार के लिए नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में लाया जाता है। यहां नागरिक अस्पताल के चिकित्सक व अन्य स्वास्थ्यकर्मी पहले से ही वर्दी में खड़े दिखाई दिए, हालांकि सामान्य तौर पर शायद ही कोई चिकित्सक वर्दी में होता है। स्वास्थ्यकर्मी पीपी किट भी पहने हुए हुए थे, लेकिन अस्पताल में सामान्य कोई कर्मचारी पीपी किट नहीं पहनता। जब एंबुलेंस मरीज लेकर अस्पताल के इमरजेंसी गेट पर पहुंची तो वहां पर स्ट्रेचर नहीं खुला। इसके कारण मरीज भी दो बार गिरने से बचाया। इसके अलावा स्ट्रेचर भी कम मिले।
मॉक ड्रिल के लिए पूरी तरह से तैयार रहा स्वास्थ्य अमला
मॉक ड्रिल को लेकर सुबह से ही अस्पताल का पूरा प्रशासन मुस्तैद रहा। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, सफाईकर्मी, वार्ड बॉय समेत अन्य कर्मियों को अपनी जगह पर तैनात कर दिया गया था। वहीं दवाइया, स्ट्रेचर, ट्रॉली व अन्य जरूरी चीजों को भी अस्पताल के पुराने भवन के बाहर उनकी सही जगह पर रख दिया गया था।
पिछले एक साल से खराब है अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट
नागरिक अस्पताल में पिछले एक साल से ऑक्सीजन प्लांट खराब है। बजट न आने के चलते प्लांट ठीक नहीं हो पा रहा है। ऑक्सीजन सिलेंडरों से काम चलाया जा रहा है, हालांकि मॉक ड्रिल को देखते हुए प्लांट की सफाई करवाई गई। यहां झाड़ी लगवाया गया। इसके बाद वार्डों में बने ऑक्सीजन के प्वाइंटों व ऑक्सीजन व्यवस्था को देखा गया।
मॉक ड्रिल में नजर आई कमियों को दूर करने के आदेश : सीएमओ
मॉक ड्रिल का आयोजन करवाने का मुख्य उद्देश्य है कि यदि कोई भी आपातकालीन स्थिति आती है तो उससे निपटने के लिए तैयार रहें। इस स्थिति में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि स्थिति से किस प्रकार निपटा जा सकता है इसके लिए कार्य करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम है। -डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन, जींद।