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सड़क से लेकर अस्पताल तक भटकते रहे लोग

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बस स्टैंड पर कर्मचारियों को संबोधित करते एसडीएम सतबीर कुंडू। - फोटो : bureau
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 ट्रेड यूनियन और कर्मचारी संगठनों द्वारा बुलाई गई राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले भर में मिलाजुला असर रहा। सबसे अधिक परिवहन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। इसके चलते लोग सड़कों पर बस व अस्पताल में दवा के लिए भटकते रहे। वहीं रोडवेज की बस चलवाने के लिए प्रशासन ने प्रयास किए, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इस मशक्कत में कर्मचारी ही आपस में भिड़ गए। शुक्रवार को हड़ताल के कारण रोडवेज, नागरिक अस्पताल व बैंकों की सेवाएं बाधित रहीं। हड़ताल के साथ आंदोलन की शुरुआत सबसे पहले सुबह चार बजे बस स्टैंड पर शुरू हो गई। यहां चार बजे कर्मचारी आकर डट गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच डीसी विनय सिंह ने मौके पर पहुंच कर कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे किसी भी बस को जबरन नहीं रोकें। इस दौरान पहली बस डिपो से करीब 04:20 बजे निकालने का प्रयास किया, लेकिन कर्मचारियों ने इसका विरोध करते हुए बस को वापस डिपो में भेज दिया। इस दौरान पुलिस व कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। इस घटना से कर्मचारी भड़क गए और डीसी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद डीसी विनय सिंह ने बस स्टैंड स्थित रोडवेज महाप्रबंधक कार्यालय में कर्मचारी नेताओं से बातचीत भी की, लेकिन सिरे नहीं चढ़ सकी और हड़ताल जारी रही। वहीं सहकारी समिति की बसों से लोग अपने गंतव्य तक पहुंचे।
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बस नहीं चलवा सका प्रशासन
इसके बाद प्रशासन ने दोबारा सुबह करीब आठ बजे फिर से बस निकालने का प्रयास किया। सवा आठ बजे एसडीएम व ड्यूटी मजिस्ट्रेट सतबीर कुंडू ने कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए काम करने वाले कर्मचारियों को जबरन नहीं रोकने का आह्वान किया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा में एक बस को निकालने का प्रयास किया। सुबह 08:25 बजे एक बस डिपो से बाहर निकलकर आई। बस स्टैंड के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने विरोध करते हुए बस के चालक व परिचालक पर हमला बोल दिया। इस बीच चालक तो बच निकला, लेकिन कर्मचारियों ने परिचालक को दबोच लिया और उसके साथ झड़प हुई। इसके बाद कुछ कर्मचारियों ने रोडवेज की बस की हवा निकाल दी, हवा निकालने वाले कर्मचारी को पुलिस ने धुना। प्रशासन तमाम प्रयासों के बावजूद भी बस नहीं चलवा सका। हैरानी की बात है कि करीब 20 जोड़े चालक व परिचालक (40) कर्मचारी बस चलाने के लिए तैयार रहे, लेकिन बस रूट पर नहीं जा सकी।

इलाज के लिए भटकते रहे लोग
हड़ताल का व्यापक असर स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिला। हालांकि चिकित्सक हड़ताल पर नहीं रहे, लेकिन अस्पताल में पर्ची बनाने से लेकर दवा देने के लिए कोई नहीं था। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ा। सिर्फ आपातकाल सेवाएं ही चली। इसके अलावा टेस्ट के लिए लैब व एक्स-रे सेवाएं भी बंद रहीं।
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नहीं मिली दवा
मुझे शुगर की दिक्कत है, मैं दवा लेने के लिए नागरिक अस्पताल पहुंची, लेकिन यहां कोई पर्ची बनाने वाला ही नहीं है। ऐसे में डॉक्टर को दिखाना संभव नहीं है। वहीं न कोई दवाई देने वाला है। लैब भी बंद है। बहुत परेशानी हुई।
- सुषमा, मरीज

जरूरी काम से पानीपत जाना है
हमें पारिवारिक जरूरी काम से पानीपत जाना है। इसके लिए अल सुबह बस स्टैंड भी पहुंचे, लेकिन यहां आने के बाद पता चला कि हड़ताल है। ऐसे में अब दिन में किसी अन्य वाहन से पानीपत जाना पड़ेगा।
- विक्की

यहां सामान्य चला काम
हड़ताल के बावजूद कई विभागों में कामकाज सामान्य रहा। लघु सचिवालय के सभी कार्यालयों में कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवाएं सामान्य रही। डीसी ऑफिस, एसडीएम ऑफिस, तहसील, सिंगल विंडो व्यवस्था पर सेवाएं सामान्य दिनों की तरह जारी रही। इसके अलावा नगर परिषद में भी काम काज अन्य दिनों की तरह ही हुआ।

हड़ताल के आंकड़े
विभाग         कुल कर्मचारी        हड़ताल पर कर्मचारी
नागरिक अस्पताल    154            52
सिंचाई विभाग        600            124
बिजली निगम        1166        1080
जनस्वास्थ्य विभाग    600           300
रोडवेज            1644             468       (प्रथम शिफ्ट में)


केंद्र तथा प्रदेश की सरकार लगातर आम आदमी के विरोध की नीतियां लागू कर रही हैं। इसमें रोड सेफ्टी बिल से लेकर तमाम नीतियां शामिल हैं। निजीकरण के कारण युवाओं को शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं। जनता के मुद्दों को लेकर हड़ताल की गई है, जो पूर्ण रूप से सफल रही।
- विनोद शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता हरियाणा कर्मचारी महासंघ।

हड़ताल सरकार की मजदूर व कर्मचारी विरोधी नीति पर करारा तमाचा
हड़ताल के दौरान मजदूर यूनियन सीटू ने नेहरू पार्क से बस स्टैंड तक प्रदर्शन किया। सीटू के राज्य उपाध्यक्ष कामरेड सुरेंद्र मलिक ने कहा कि राष्ट्रव्यापी हड़ताल पूरे हरियाणा में सरकार की मजदूर, कर्मचारी विरोधी साजिशों पर एक करार तमाचा है। महंगाई, बेरोजगारी, श्रम कानूनों में पूंजीवादी बदलाव, बिजली, परिवहन, शिक्षा व स्वास्थ्य के निजीकरण, बैंक, बीमा, रेलवे व रक्षा क्षेत्रों में एफडीआई के खिलाफ 18,000 रुपये न्यूनतम वेतन, बेरोजगारी भत्ते, निर्माण मजदूरों के लिए श्रम कल्याण बोर्ड में पंजीकरण व सुविधाएं, सभी स्कीम वर्कर को पक्का करने, ग्रामीण चौकीदार, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करवाने, मनरेगा में साल भर काम व 600 रुपये मजदूरी की मांग और सभी महकमों में स्थायी भर्ती की मांग को लेकर सैकड़ों स्कीम वर्कर हड़ताल में शामिल हुए। नेहरू सभा में विरोध सभा के बाद सीटू कार्यकर्ताओं ने शहर में प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

नरवाना में भी थमें रहे बसों के पहिए
नरवाना। ट्रेड यूनियनों, केंद्र व प्रदेश सरकार की फेडरेशनों के आह्वान पर की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का नरवाना में काफी असर रहा। हड़ताल में मुख्य रूप से परिवहन विभाग, बिजली विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग, अध्यापक संघ, भारत नौजवान सभा, केवाइएस, एसएफआई, मजदूर संघ, डीवाईएफआई के साथ-साथ हजारों कर्मचारियों व संगठनों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। शुक्रवार सुबह ही नेहरू पार्क में कर्मचारी, मजदूर संघ व अन्य संगठनों के लोग जुटने शुरू हो गए थे। इसके बाद नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शन नेहरू पार्क से शुरू होकर श्री विश्वकर्मा चौक होते हुए बस स्टैंड पर संपन्न हुआ। प्रदर्शन की अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान इंद्र सिंह श्योकंद व मंच संचालन सचिव मेवा सिंह ने किया।  इंद्र सिंह श्योकंद ने अपने संबोधन में निजीकरण को रोकने, ठेका-प्रथा आउटसोर्सिंग व सरकारी विभागों को ठेके पर देने का विरोध किया। रोड एंड सेफ्टी बिल रद्द करने की मांग की। छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करके सातवां वेतन आयोग शीघ्र लागू करने को कहा।

एलआईसी कर्मचारी भी हड़ताल पर
भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा के सभी कर्मचारी पूरे दिन की हड़ताल पर रहे। उन्होंने केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरोध में विभिन्न जन संगठनों के रोष प्रदर्शन में भाग लिया। नरवाना में अधिकतर बैंकों में कामकाज ठप रहा जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों को बैंक बंद होने की जानकारी नहीं थी जिसके कारण अधिकतर लोग बैंकों के गेट पर खड़े रहे।
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