22जेएनडी13: जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का फोटो।
जींद। एक जून से 30 जून तक होने वाले ग्रीष्म अवकाश में इस बार विद्यार्थियों को परंपरागत तरीके से स्कूल का कार्य नहीं करना होगा। इस बार निपुण कार्यक्रम और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की अनुपालना में स्कूल के होमवर्क में बदलाव किया गया है। इसमें बाल वाटिका से लेकर पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए जारी गृह कार्य पर परंपरागत शिक्षण लेखन और रटने की प्रकृति की अपेक्षा निपुण में अनुभव आधारित शिक्षण कार्य करवाया जाएगा।
इस कार्य में स्वतंत्र समय सारिणी, स्वछंद शिक्षण, पाठ्य पुस्तकों से अलग कहानी, बाजार, समाज व परिवेश के माध्यम से पठन पाठन करवाया जाना है। यह कार्य परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर किया जाना है। इसमें दादा-दादी, नाना-नानी समेत घर के बड़े बुजुर्ग मेंटर की भूमिका अदा करेंगे। यह बुजुर्ग अपने जीवन के अनुभवों के साथ नई पीढ़ी को सामान्य ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, मार्गदर्शन, दक्षता व कौशल व्यवहार कुशलता प्रदान करेंगे। इनसे विद्यार्थी को पढ़ने-लिखने व गणना जैसे कौशल की जानकारी प्राप्त होगी। इसमें विद्यार्थियों को आकलन, अनुमान लगाना, विश्लेेषक, एकीकरण, अवलोकन प्रबंधन व प्रस्तुतिकरण का ज्ञान मिलेगा और उनके शब्दकोष का विस्तार होगा। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद का मानना है कि परिवार के सदस्यों के साथ जुड़कर बनाई गई यह गतिविधियां विद्यार्थियों को मोबाइल, कंप्यूटर और टेलीविजन से दूर करके अनुभव प्राप्त करने का मौका देगी। इसके अलावा बुजुर्गों से भी लगाव बढ़ेगा।
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बालवाटिका से पांचवीं कक्षा तक का गृह कार्य में होगा बदलाव
बाल वाटिका से पांचवी कक्षा तक के विद्यार्थियों के गृह कार्य में इस बार बदलाव किया जाएगा। इसके लिए निर्देश दिए गए हैं कि 30 व 31 मई को पीटीएम का आयोजन कर स्कूल मुखिया व शिक्षक अभिभावकों को निर्देश दें कि वह अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं और उनमें अच्छे संस्कार का समावेश करें।
डॉ. सुभाष वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी जींद।