जुलाना। जुलाना क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में लंबे समय से महिला रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) की नियुक्ति नहीं होने के कारण गर्भवतियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टर की अनुपलब्धता के चलते प्रसव एवं महिलाओं से संबंधित जटिल मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव नहीं हो पा रहा है।
स्थिति यह है कि सीएचसी में आने वाली अधिकांश गर्भवतियों की केवल प्राथमिक जांच की जाती है और इसके बाद उन्हें जींद, रोहतक या अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। कई मामलों में प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद भी मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजना पड़ता है जिससे रास्ते में जोखिम बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस व्यवस्था से न केवल मरीज बल्कि उनके परिजनों को भी भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। निजी अस्पतालों का सहारा लेना कई परिवारों के लिए आर्थिक बोझ साबित हो रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों तक पहुंचने में समय और संसाधनों दोनों की खपत बढ़ जाती है।
रामकुमार, सतबीर, सुनील, राजेंद्र प्रसाद, रामबीर और सतीश सहित स्थानीय लोगों ने बताया कि जुलाना क्षेत्र की बड़ी आबादी इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है, लेकिन विशेषज्ञ की कमी के कारण उन्हें बार-बार अन्य शहरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार एंबुलेंस या वाहन की व्यवस्था में देरी होने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सीएचसी में स्थायी महिला रोग विशेषज्ञ की जल्द नियुक्ति की जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं का उपचार स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सके। उनका कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती से न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार आएगा।
वर्जन
यह मामला उनके संज्ञान है। इसको लेकर निदेशालय को पत्र लिखा भी हुआ है। उम्मीद है जल्द ही सीएचसी में महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति हो जाएगी।
-डॉ. सुमन कोहली, सीएमओ, नागरिक अस्पताल जींद