जींद। सोमवार की बजाय मंगलवार को वायु प्रदूषण में कुछ कमी जरूर आई, लेकिन अभी तक जींद शहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। सोमवार को एक्यूआई 416 था, जो मंगलवार को कुछ कम होकर 376 तक पहुंच गया, लेकिन फिलहाल भी स्थिति काफी गंभीर है। लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। नागरिक अस्पताल में फेफड़ों में संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। इसके अलावा आंखों की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
वायु प्रदूषण अधिक होने के कारण सांस के रोगियों को काफी तकलीफ हो रही है। जिन लोगों को पहले ही सांस का रोग है, उनको गंभीर परेशानी हो रही है। चिकित्सकों ने ऐसे लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी है। इसके अलावा सभी लोगों को इस समय मास्क लगाने की भी जरूरत है। अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक श्वास रोगी आ रहे हैं। इसके अलावा फेफड़ों में संक्रमण के मामले भी बढ़ने लगे हैं। 50 मरीज फेफड़ों में संक्रमण की शिकायत लेकर आ रहे हैं। आंखों की ओपीडी भी लगातार बढ़ती जा रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गीतांशु ने कहा कि वायु प्रदूषण का असर आंखों पर भी पड़ रहा है। वायु प्रदूषण से आंखें लाल हो रही हैं तथा पानी बहने लगता है। ज्यादा रगड़ने से आंख खराब भी हो सकती हैं। डॉ. गीतांशु ने कहा कि दिन में कई बार आंखों को साफ पानी से धोना चाहिए।
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सड़कों तथा पौधों पर किया पानी की छिड़काव
वायु प्रदूषण को देखते हुए जिले में निर्माण कार्यों, खनन व अन्य धूल पैदा करने वाले उपक्रमों पर रोक लगाई गई है। दूषित वातावारण से निपटने के लिए शहर में सड़कों तथा पौधों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि धूल तथा मिट्टी ना उड़े।
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पराली जलाने के मामले कम, फिर भी वातावरण दूषित
पिछले साल के मुकाबले इस साल पराली जलाने के मामले कम आए हैं। बावजूद इसके वातावरण फिर भी दूषित बना हुआ है। पिछले साल 182 मामले पराली जलाने के सामने आए थे। अब तक 140 मामले सामने आए हैं। कृषि तथा अन्य अधिकारी लगातार खेतों पर नजर बनाए हुए है। काफी हद तक पराली जलाने पर अंकुश लगा। वातावरण दूषित के मामले में उन्हीं हालातों से गुजरना पड़ रहा है।