जींद। हिमाचल प्रदेश के कसौली में हरियाणा शिक्षा विभाग की ओर से तीन दिवसीय लीडरशिप कॉन्क्लेव ‘निपुण 2.0’ कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 19 जून से 21 जून तक चला, जिसमें हरियाणा के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों और जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटरों ने भाग लिया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत चल रहे निपुण भारत मिशन को और अधिक प्रभावी बनाना था। साथ ही शिक्षा अधिकारियों की प्रशासनिक और शैक्षणिक नेतृत्व क्षमता को मजबूत करना भी इसका एक अहम लक्ष्य रहा।
कार्यक्रम में हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक आईएएस स्वप्निल और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, गुरुग्राम के निदेशक संवर्तक सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाने पर मार्गदर्शन दिया।
कार्यशाला को वैश्विक दृष्टिकोण देने के लिए विदेशों से भी विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। इन अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने प्राथमिक शिक्षा में हो रहे वैश्विक बदलाव, बाल मनोविज्ञान और आधुनिक शिक्षण तकनीकों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी छात्र के भविष्य की नींव प्राथमिक शिक्षा होती है इसलिए इस स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों का नेतृत्व कौशल मजबूत होना अनिवार्य है।
जींद जिले से जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी महेंद्र सिंह और एफएलएन कोऑर्डिनेटर राजेश वशिष्ठ ने इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की। राजेश वशिष्ठ के अनुसार, कार्यशाला के दौरान आयोजित एक समूह प्रतियोगिता में उनके दल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसके लिए उन्हें मंच पर विशेष सम्मान भी मिला। यह सम्मान राज्य कार्यक्रम अधिकारी प्रमोद शर्मा और एससीईआरटी गुरुग्राम के निदेशक संवर्तक सिंह द्वारा प्रदान किया गया। कार्यशाला में मिले अनुभवों और नई रणनीतियों को अब जींद सहित हरियाणा के स्कूलों में लागू किया जाएगा।
निपुण 2.0: प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की नई पहल
निपुण 2.0 का लक्ष्य है कि कक्षा पांचवीं तक हर बच्चा पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणित में पूरी तरह सक्षम बने। इसके लिए नई रणनीति के तहत कक्षाओं को रटने की बजाय खेल-खेल में सीखने की दिशा में बदला जाएगा। साथ ही जिला और ब्लॉक स्तर पर नियमित स्कूल निरीक्षण और शिक्षकों को ऑन-साइट सहायता देने पर जोर दिया जाएगा। इस कॉन्क्लेव से मिले नेतृत्व कौशल को अब ब्लॉक स्तर तक शिक्षकों तक पहुंचाने की योजना है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता जमीनी स्तर पर और बेहतर हो सके।