जींद। सोनीपत रेलवे ट्रैक पर झाड़ियों की सफाई का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। हाइड्रोजन ट्रेन के प्रस्तावित संचालन को देखते हुए यह काम बेहद अहम माना जा रहा है। अभी तक ट्रैक के किनारे प्रभावित एरिया को चिह्नित नहीं किया गया है।
रेलवे के नियमों के अनुसार ट्रैक के दोनों ओर कम से कम 10-10 मीटर तक झाड़ियों, घास को पूरी तरह साफ रखना जरूरी होता है क्योंकि हाइड्रोजन गैस संवेदनशील मामला है। सोनीपत ट्रैक के कई हिस्सों में फिलहाल घनी झाड़ियां और सूखी घास फैली हुई है जो खतरे का कारण बन सकती है। खासतौर पर गर्मी के मौसम में सूखी वनस्पति जल्द आग पकड़ लेती है।
हाइड्रोजन गैस अत्यंत ज्वलनशील होती है। यदि समय रहते झाड़ियों की सफाई नहीं की गई तो गर्मी के दिनों में स्थिति गंभीर हो सकती है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण छोटी सी चिंगारी भी बड़ा नुकसान कर सकती है।
हाइड्रोजन ट्रेन जैसी आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परियोजना की सफलता के लिए ट्रैक की सुरक्षा सबसे अहम है। झाड़ियों की सफाई में देरी भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए रेलवे को इस दिशा में तेजी से कदम उठाने की जरूरत है।
गेहूं कटाई के समय होती है आगजनी की घटनाएं
ग्रामीण क्षेत्र से गुजरने वाले इस रेलवे ट्रैक के आसपास खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। गेहूं की कटाई के समय आगजनी की घटनाएं होती हैं। कई बार यह आग फैलते-फैलते रेलवे ट्रैक तक पहुंच जाती है। पहले भी ट्रैक के नजदीक आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिससे रेल यातायात पर असर पड़ा है। ट्रैक किनारे झाड़ियां और सूखी घास रहती हैं तो आग तेजी से फैल सकती है।
टेस्टिंग के लिए एक और भेजा सैंपल
हाइड्रोजन ट्रेन में भरने वाली गैस की टेस्टिंग के लिए एक और सैंपल भेजा गया है। अभी गैस से नमी सुखाने के लिए हीटर भी नहीं लगे हैं। ठंड के कारण गैस में नमी आ रही है। रिपोर्ट आने के बाद भी आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। अभी वायरिंग का काम चल रहा है। पिछले दिनों लखनऊ से स्पशेल कोच में वारिंग का सामान आया था। सैंपल की रिपोर्ट सही आने पर आरडब्ल्यूएसओ टीम दोबारा से जींद आगे की जांच के लिए पहुंचेगी।
वर्जन
ट्रेन के ट्रायल से पहले सोनीपत रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ सफाई करवाई जाएगी। इसके बाद ही ट्रेन का ट्रायल लिया जाएगा। सबकुछ सही मिला तो उसके बाद हरी झंडी मिलेगी।
-बिजेंद्र कुमार, एसएसई, नई दिल्ली