संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। परिवहन की किलोमीटर स्कीम के तहत बसें तकनीकी रूप से कंडम हो चुकी हैं। इसके बावजूद बसों को लंबे रूटों पर रूटों पर भेजा जा रहा है। किलोमीटर स्कीम वाली बसों की खिड़कियां और दरवाजे खराब हो चुके हैं। हादसे की आशंका बनी रहती है।
बुधवार को बस अड्डे पर जाकर बसों की पड़ताल की गई तो जींद से रोहतक रूट पर दौड़ने वाली रोडवेज बसों के पाइप उखड़े हुए मिले। वहीं, नई बसों की हालत तो ठीक थी लेकिन पुरानी बसों की हालत कंडम थी।
किलोमीटर स्कीम वाली अधिकतर बसें चंडीगढ़ रूट पर चलाई जा रही हैं। जर्जर हालत न केवल यात्रियों के लिए असुविधा का कारण बन रही है बल्कि उनकी सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। तकनीकी खामियों के बावजूद बसें भगवान भरोसे दौड़ रही हैं। ब्रेक, सस्पेंशन और इंजन से जुड़ी शिकायतें भी सामने आ रही हैं। लंबे रूटों पर चलने के कारण बसें अधिक दबाव में रहती हैं लेकिन समय पर मरम्मत और नियमित जांच न होने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
मरम्मत के बिना कैसे दौड़ेगी बसें
यात्री रमेश कुमार, कुलदीप शर्मा, सुनील, सतीश प्रजापत का कहना है कि किलोमीटर स्कीम वाली अधिकतर बसें तो पूरी तरह से कंडम हो चुकी है। इन बसों की समय पर मरम्मत करवाई जानी चाहिए, जिससे यात्री सुरक्षित सफर कर सकें। मांग है कि किमी. स्कीम वाली बसों की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और जो बसें कंडम हो चुकी हैं उन्हें सड़कों से हटाया जाए। साथ ही लंबे रूटों पर नई और सुरक्षित बसें चलाने की व्यवस्था की जाए ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा मिल सके।
रोडवेज बसों की समय पर मरम्मत करवाई जा रही है। फिटनेस चेक करने के बाद ही बसों को वर्कशॉप से बाहर निकाला जाता है।
-राहुल जैन, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो जींद