जींद। शहर में नगर परिषद का कचरा उठान के लिए नया टेंडर अब तक अलॉट नहीं हो पाया है। इस कारण सफाई व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। हालात यह हैं कि सड़कों, गलियों, बाजारों में कूड़े के ढेर नजर आने लगे हैं जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल पूरी सफाई व्यवस्था नगर परिषद के कर्मचारियों के सहारे चल रही है।
नगर परिषद के अनुसार, शहर से प्रतिदिन करीब 125 टन कचरा निकलता है। सफाई को लेकर नगर परिषद पर 28 टीपर हैं जो घर-घर जाकर कूड़ा एकत्रित करते हैं। वहीं, कूड़ा उठने के लिए 16 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रखी गई हैं जबकि 150 से ज्यादा रेहड़ी भी है।
पहले यह कचरा निजी एजेंसी की ओर से नियमित रूप से उठाया जाता था लेकिन टेंडर प्रक्रिया में देरी के चलते अब यह जिम्मेदारी अस्थायी रूप से नगर परिषद के कर्मचारियों को संभालनी पड़ रही है। परिषद के पास न तो पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही संसाधन। इस कारण पूरे शहर से समय पर कचरा उठाना संभव नहीं हो पा रहा है।
कई वार्डों में कचरा दो-दो दिन तक नहीं उठ रहा जिससे बदबू और मच्छरों की समस्या बढ़ गई है। खासकर बाजार क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में हालात ज्यादा खराब हैं।
दुकानदारों सुमित मल्होत्रा, राहुल तनेजा, सतीश पूनिया का कहना है कि कचरा लंबे समय तक पड़ा रहने से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। शहर में फैल रही गंदगी का असर आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण पर भी पड़ सकता है क्योंकि मई-जून माह में स्वच्छता सर्वेक्षण होगा। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के आधार पर तय की जाती है। यदि जल्द ही कचरा उठान का टेंडर अलॉट कर निजी एजेंसी के माध्यम से सफाई व्यवस्था शुरू नहीं की गई तो शहर की रैंकिंग गिर सकती है।
शहर की आबादी को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या कम
नगर परिषद में सफाई के लिए 290 कर्मचारी तैनात हैं लेकिन शहर की आबादी को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या कम है। नगर परिषद ने एचकेआरएनएल के तहत लगे 100 कर्मचारियों को ले लिया है। अब नगर परिषद के पास सफाई कर्मचारियों की संख्या अब 390 हो गई है। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था इन कर्मचारियों के कंधों पर है।
टेंडर को जल्द अलॉट करने की मांग
शहरवासी सुनील, रामगोपाल, पुष्पेंद्र, रामप्रकाश, रूपेश, सतीश कुमार का कहना है कि कचरा उठान का टेंडर जल्द से जल्द अलॉट किया जाए ताकि निजी एजेंसी के माध्यम से नियमित सफाई व्यवस्था बहाल हो सके। स्वच्छ शहर केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसके लिए मजबूत व्यवस्था और संसाधनों की भी जरूरत होती है।
टेंडर अलॉट प्रक्रिया चल रही हैं। जल्द ही कचरा उठान का काम निजी एजेंसी को सौंप दिया जाएगा। फिलहाल नप सफाई व्यवस्था को संभाले हुए है।
-ऋषिकेश चौधरी, ईओ, नगर परिषद जींद