जींद। शहर के सबसे बड़े अटल पार्क का उद्घाटन हुए दो दिन भी नहीं हुए हैं और लोग अब इसका मजाक उड़ाने लगे हैं। अहम बात यह है कि अटल पार्क के झूले टूट गए हैं। लोग अब मजाक उड़ा रहे हैं कि जो लोग शहर के करोड़ों रुपये की सौगात दिलाने का श्रेय ले रहे थे, उन्होंने पार्क की गुणवत्ता का कितना ध्यान रखा है। कुछ झूलों के लचक वाले सारे स्प्रिंग टूट चुके हैं। एक झूले का तो सब कुछ ही अलग हो गया। लोग कह रहे हैं कि क्या यही है करोड़ों का विकास। पोस्ट करने वाला युवक कहता है कि अब यहां कोई श्रेय नहीं लेगा, यह किसके काम हैं, यह नहीं बताएंगे।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साल 2014 में अटल पार्क की घोषणा की थी। इसका निर्माण कार्य साल 2018 में शुरू हुआ। इस साल तीन फरवरी को अटल पार्क का मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नरवाना में एक कार्यक्रम के दौरान उद्घाटन किया था, लेकिन रखरखाव व देखरेख के लिए नगर परिषद के पास स्टाफ नहीं होने के कारण पार्क को आमजन के लिए नहीं खोला गया था। पिछले दिनों अन्ना टीम जींद अटल पार्क को खोलने के लिए प्रदर्शन किया था। अभी शुक्रवार को ही नगर परिषद की तरफ से पार्क को आमजन के लिए भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिढ़ा, जिला नगर आयुक्त सुरेंद्र बैनिवाल और नगर परिषद चेयरपर्सन प्रतिनिधि डॉ. राज सैनी की उपस्थिति में खोला गया था। नगर परिषद अभियंता अमित कुमार ने बताया कि यह झूले डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में हैं। सोमवार को निरीक्षण किया जाएगा, अगर झूले टूटे हैं, तो ठेकेदार से ठीक करवाए जाएंगे। छोटे बच्चों के झूले हैं, अगर उन पर बड़ी उम्र वाले 80 से 90 किलोग्राम वजन वाले लोग बैठेंगे, तो झूले टूटेंगे। इस संबंध में यहां बोर्ड भी लगाया जाएगा।
घटिया सामग्री लगाने के आरोप
शहर के एक प्रसिद्ध वकील ने कहा कि पार्क पर करोड़ों रुपये तो खर्च कर दिए लेकिन गुणवत्ता की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। कुछ लोग केवल लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए सौगात की बात करते हैं। वास्तव में यदि पार्क में लगे झूलों पर गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता तो यह नौबत नहीं आती।
कोट
झूले टूटने की सूचना उन्हें मिली है। यह झूले बच्चों के लिए थे, लेकिन इन झूलों पर लोगों के बैठने से वजन ज्यादा होने से टूट गए। झूलों को जल्द ठीक करवाया जाएगा। पार्क में देखरेख के लिए चौकीदार भी लगाए हुए हैं।
सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद।