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Jind News: बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन हटने से आसपास के गांवों ने ली राहत की सांस

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नरवाना। दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर किसानों का बुधवार को प्रस्तावित अर्धनग्न पैदल मार्च स्थगित होने से पीपलथा, ढाबी टेक सिंह और खनौरी समेत कई गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों को आशंका थी कि यदि पदयात्रा के दौरान हालात बिगड़े और बॉर्डर पर बैरिकेडिंग व यातायात डायवर्जन लंबे समय तक जारी रहा तो सबसे अधिक परेशानी उन्हें ही झेलनी पड़ेगी।
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वर्ष 2024 के किसान आंदोलन के दौरान गांवों की सड़कों पर बढ़े भारी यातायात से हुई परेशानी और क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की याद अभी भी ग्रामीणों के जेहन में है। ऐसे में इस बार फिर वही स्थिति बनने की आशंका से ग्रामीण चिंतित थे। प्रशासन के आश्वासन के बाद पदयात्रा स्थगित होने और यातायात सामान्य होने से फिलहाल उन्हें राहत मिली है। वहीं किसानों की मांगों पर 4 सितंबर को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक प्रस्तावित है।

मांगों को लेकर दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर 16 अगस्त से डटे किसानों की 51 किसानों के जत्थे वाली प्रस्तावित पैदल मार्च प्रशासन के आश्वासन के बाद बुधवार को स्थगित कर दी गई। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बैठक का प्रस्ताव स्वीकार करते हुए पदयात्रा रोकने की घोषणा की। इससे पहले पदयात्रा को लेकर प्रशासन ने बॉर्डर क्षेत्र में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए बैरिकेडिंग की थी। हाईवे का यातायात वैकल्पिक रास्तों से गांवों की ओर डायवर्ट किए जाने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई थी।
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पैदल यात्रा स्थगित होने के बाद जींद प्रशासन ने दिल्ली-पटियाला नेशनल हाईवे पर दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर लगी दोनों तरफ की बैरिकेडिंग हटा दी गई हैं। हाईवे पर वाहनों का आवागमन फिर शुरू हो गया है। हाईवे खुलने से आमजन ने राहत की सांस ली है।

2024 के जख्म अभी भूले नहीं ग्रामीण

पीपलथा के लोगों हरीश, मंगल, बलवान और अजमेर का कहना है कि वर्ष 2024 में दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान लंबे समय तक यातायात बाधित रहा था। हाईवे से गुजरने वाले छोटे-बड़े वाहनों को गांवों के रास्तों से निकाला गया। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। गलियों और संपर्क मार्गों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ गया था। आंदोलन समाप्त होने के बाद भी ग्रामीणों को इन सड़कों की परेशानी झेलनी पड़ी थी। इसी अनुभव के कारण इस बार जैसे ही बॉर्डर पर दोबारा बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन हुआ ग्रामीणों को डर सताने लगा कि कहीं फिर वही हालात न बन जाएं। पिछले तीन-चार दिनों से गांवों से दिनभर छोटे-बड़े वाहनों के गुजरने से शोर और आवागमन की समस्या बनी हुई थी। वाहन चालकों को करीब आठ से दस किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। ग्रामीणों को आशंका थी कि आंदोलन लंबा खिंचा तो सड़कों को दोबारा नुकसान पहुंच सकता है।

किसानों की मांगों पर सरकार से बातचीत का रास्ता खुला

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेतृत्व में प्रस्तावित किसान बचाओ पदयात्रा का उद्देश्य किसानों की लंबित मांगों को सरकार तक पहुंचाना था। किसानों की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते से खेती, डेयरी, पोल्ट्री और मछली पालन को बाहर रखना, स्वामीनाथन आयोग के C2+50 प्रतिशत फार्मूले के अनुसार सभी फसलों की एमएसपी पर कानूनी गारंटी, किसानों को कर्जमुक्त करना और गन्ने का एफआरपी बढ़ाना शामिल है। 4 सितंबर की प्रस्तावित बैठक में किसान प्रतिनिधि इन सभी मुद्दों को सरकार के सामने रखेंगे। डल्लेवाल ने स्पष्ट किया कि मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई तो किसान दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि किसानों की मांगों का समाधान बातचीत से हो लेकिन आंदोलन की स्थिति में गांवों की सड़कों और आमजन को परेशानी से बचाने के भी पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
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