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आध्यात्मिक यात्रा का उद्देश्य मानवता को कर्म में शामिल करना : एचएस चावला

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20जेएनडी37-निरंकारी सत्संग भवन में प्रवचन सुनते हुए श्रद्धालु।
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जींद। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज के निर्देशानुसार निरंकारी सत्संग भवन में प्रवचन का आयोजन किया गया। संत निरंकारी मंडल के वाइस चेयरमैन एचएस चावला ने कहा कि सदियों से संतों और ऋषियों ने एक ही ज्ञान दिया है कि आध्यात्मिक यात्रा का उद्देश्य मानवता को कर्म में शामिल करना है।
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सर्वशक्तिमान द्वारा दिए गए उपहारों और बुद्धि के माध्यम से की गई खोजों का उपयोग जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ऐसा विश्व जो सृष्टि की पवित्रता और पूर्णता को प्रतिबिंबित करता हो। परमात्मा द्वारा प्रदान की हुई चीजें एवं इंसानों ने भी जो आविष्कार किए हैं, उनका सदुपयोग करते हुए इस धरा को और अधिक सुंदर बनाना है। उन्होंने कहा कि सतगुरु हमारी सोच को सकारात्मक दिशा दे रहे हैं। हमारी नकारात्मकता को संकुचित कर रहे हैं। सोच सकारात्मक होगी तो सबका भला सोचना संभव होगा और सबका भला किया जा सकेगा। जबकि सोच का नकारात्मक होना हमें विपरीत दिशा की ओर ले जाएगा। संकीर्णताओं व तंगदिली का विस्तार कर कभी किसी को लाभ नहीं हुआ है। हमारी सोच विशाल हो, हमारा कर्म परोपकार और सेवाभाव वाला हो।
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