जींद। शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर में 700 टन कूड़ा सड़ रहा है। कूड़ा उठान नगर परिषद के लिए गंभीर समस्या बन गया है। 180 सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण मुख्य बाजार से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक, लगभग 50 स्थानों पर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं।
बदबू और गंदगी फैल रही है। लोगों का जीना दूभर हो गया है। स्थिति को संभालने के लिए नगर परिषद प्रशासन अब वैकल्पिक इंतजामों का सहारा ले रहा है। रात के समय शहर के करीब पांच स्थानों से कूड़ा उठवाकर उसे पुराने बस अड्डा परिसर में डलवाया गया। इस परिसर को अस्थाई डंपिंग स्टेशन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालांकि, यह व्यवस्था भी स्थाई समाधान नहीं बन पा रही है और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद के कर्मचारी रात के समय प्राइवेट सफाई कर्मियों से चोरी-छिपे कूड़ा उठान करवा रहे हैं।
दिन में हड़ताली सफाई कर्मचारियों के विरोध और संभावित विवाद के चलते यह काम रात के अंधेरे में किया जा रहा है। इतना ही नहीं, अस्थाई डंपिंग स्थल पर भी रात के समय सफाई कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। जो वहां पहरा देते हैं ताकि किसी तरह का विवाद न हो सके।
नगर परिषद कर्मचारियों में भी तनाव का माहौल बना हुआ है। उन्हें लगातार इस बात का डर सता रहा है कि कहीं हड़ताली कर्मचारी उनके साथ टकराव न कर लें। यही कारण है कि पूरा काम बेहद सतर्कता और गोपनीय तरीके से किया जा रहा है।
बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ा
शहरवासियों की परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। कूड़े के ढेरों के कारण जहां एक ओर दुर्गंध फैल रही है, वहीं दूसरी ओर बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। खासकर गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हालात और बदतर हो सकते हैं।
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समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए नगर परिषद लगातार काम कर रही है। शहर की यह मुख्य समस्या होने के कारण रात को कई स्थानों से कूड़े का उठान करवाया गया। कूड़े को शहर से बाहर ले जाने पर हड़ताली सफाई कर्मी विरोध जताते हैं। कुछ समय के लिए पुराने बस अड्डे को ही अस्थायी डंपिंग स्टेशन बनाया गया है ताकि हड़ताल समाप्त हो जाने के बाद यहां से उठवाया जाएगा।
-ऋषिकेश चौधरी ईओ नगर परिषद जींद