पत्रकारों से बातचीत करते भाकियू के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कर्मसिंह मधाना। संवाद।
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जींद। भाकियू के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मधाना ने कहा कि कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग सरकार जल्द मानने वाली नहीं है क्योंकि यह सारी सीमाएं लांघ चुकी है। इसके बावजूद संयुक्त किसान मोर्चा बातचीत के सारे विकल्प खुले रखे हुए हैं। अब तक नौ बार हुई बातचीत में कोई समाधान नहीं निकला। सरकार किसानों को बरगलाना चाहती है लेकिन किसान भी मानने वाले नहीं हैं। वे रविवार को जाट धर्मशाला में पहुंचे और किसानों से 23 जनवरी को ही ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली कूच करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहे कितने भी हथकंडे अपना ले, किसान अब बिना कृषि कानूनों को रदद करवाए दिल्ली से वापस नहीं लौटेगा। मधाना ने कहा कि सरकार जितना समय लगाएगी, किसान संगठन उतने ही मजबूत होंगे। जिस समय 10 सितंबर को पीपली में आंदोलन की शुरुआत की थी, उस समय केवल 500 किसान ही थे और आज पांच महीने बाद लाखों किसान आंदोलन का हिस्सा बन चुके हैं। चाहे कोई किसान घर बैठा हो या दिल्ली में हो, हर किसान का सहयोग इस आंदोलन में है। घर बैठे किसान प्रतिदिन खाद्य सामग्री लेकर दिल्ली पहुंच रहे हैं। जिस प्रकार युद्ध में सैनिकों की एक टुकड़ी युद्ध लड़ने वाले सैनिकों की मदद के लिए होती है, उसी प्रकार घर बैठे किसान भी अपने साथियों की हर जरूरत को पूरा कर रहे हैं।