एक तरफ प्रधानमंत्री नेरंद्र मोदी मेक इंडिया का नारा दे रहे हैं तो दूसरे तरफ जींद जिले की औद्योगिक इकाईयां दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
औद्योगिक इस कदर पिछड़ चुकी हैं कि वह अपना मेंटिनेस चार्ज भी नहीं निकाल पा रही हैं। मौजूदा परिस्थितियों पर गौर किया जाए तो प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया की महत्वाकांक्षी योजना में जिले का उद्योग कदम मिला भी पाएगा, कहना मुश्किल है। हांसी रोड पर 28 एकड़ में बनी औद्योगिक इकाई जिसमें कुल 78 प्लॉट हैं। इन प्लाटों पर कुल 48 उद्यमियों ने अपना उद्योग शुरू किया है। इनमें से करीब एक चौथाई उद्योग मालिक अपना व्यवसाय बंद कर चुके हैं या फिर किराये पर देकर यहां से पलायन कर चुके हैं।
इस इकाई में ऐसे उद्योग भी हैं जिनमें उत्पादन ही शुरू ही नहीं हुआ है और उन पर कोर्ट में केस विचाराधीन होने के कारण बंद पड़े हैं। बाहरी उद्यमी यहां उद्योग लगाने से कतराते हैं। इसके लिए सबसे बड़ी बाधा बिजली, कच्चा माल व यातायात है। उद्यमियों के अनुसार कहने को तो उन्हें पूरे 24 घंटे बिजली देने का प्रदेश सरकार दावा करती है, लेकिन हकीकत कुछ और ही कहती है। बमुश्किल 10 से 12 घंटे ही बिजली दी जाती है। शहर में उद्योगों के पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण दूसरा सबसे मुख्य कारण कच्चे माल का अभाव होना है। जिले में कच्चा माल बाहर से ही आता है, जिसके लिए उद्यमियों को ज्यादा लागत देनी पड़ती है।
कच्चे माल के ट्रांसपोर्ट में यातायात भी बड़ी बाधा है। जींद प्रदेश के केंद्र में तो है, लेकिन इसके बावजूद यातायात की बेहतर व्यवस्था नहीं होने के कारण दूसरे जिलों से कटा हुआ है।
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गंदे पानी के निकासी की नहीं कोई व्यवस्था
शहर में 28 एकड़ क्षेत्र में उद्योग स्थापित हैं, लेकिन इनके गंदे पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। उद्योगों का व्यर्थ पानी ग्रीन हांसी रोड के सहारे बनी ग्रीन बेल्ट में छोड़ दिया जाता है, अगर यहां पानी ज्यादा हो जाए तो इस पानी को निकालकर औद्योगिक इकाई के पीछे लगे पौंधो में यह पानी छोड़ दिया जाता है। व्यर्थ पानी को इधर-उधर घुमा फिराकर वैकल्पिक प्रबंधन कर दिया जाता है, लेकिन बारिश के समय हरियाणा औद्योगिक आधारभूत संरचना (एचएसआईआईडीसी) असहाय नजर आती है।
पिछले छह साल से नहीं बनी है कोई सड़क
औद्योगिक इकाई में पिछले छह साल से कोई सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। सभी सड़कें टूटी हैं। उद्यमियों के अनुसार एचएसआईआईडीसी मेंटिनेस चार्ज के नाम पर प्रत्येक वर्ष लाखों के बिल कंपनी मालिक के पास भेज देते हैं, लेकिन मेंटिनेस कुछ नहीं हो रही है। कोई भी उद्यमी मेंटिनेस चार्ज नहीं भर रहा है। पिछले छह सालों में केवल उसी उद्यमी ने मेंटिनेस चार्ज भरा है, जिसको अपना उद्योग बेचना है। इसी वजह से दर्जन भर ऐसे उद्योग भी चल रहे हैं, मालिक द्वारा बेच दिए जाने के बावजूद खरीददार के नम नहीं हुए हैं।
मेंटिनेस नहीं तो बिल किसलिए
शहर में उद्योगों के फलने-फूलने में सबसे बड़ी बाधा बिजली समस्या तथा ज्यादा टैक्स का होना है। उद्यमियों से पूरे 24 घंटे के हिसाब से लोड के अनुसार बिल चार्ज लगाया जाता है। इसके अलावा करीब पांच माह पहले चार रुपये बढ़ा दी गई है। सुविधाओं के नाम पर तो प्रदेश सरकार कुछ नहीं दे रही है, लेकिन दिन-प्रतिदिन उद्यमियों पर टैक्स व मेंटिनेस चार्ज के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ाया जा रहा है।
सुशील कुमार, जींद सर्जिकल उद्योग मालिक
एचएसआईआईडीसी द्वारा आए महीने मेंटिनेस चार्ज के नाम पर हजारों का बिल उद्यमियों को थमा दिया जाता है, लेकिन मेंटिनेस कुछ नहीं किया जाता है। इसी वजह से उद्यमियों ने मेंटिनेस चार्ज भरना बंद कर दिया है। जब किसी उद्यमी को अपना उद्योग बेचकर यहां से जाना होता है तो उसी अवस्था में ही वह यह चार्ज भरता है।
प्यारेलाल, सचिव जींद उद्योग