10जेएनडी10: नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए पर्ची कटवाने के लिए लाइन में लगे मरीज। संवाद
जींद। निजी अस्पतालों में अब आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क इलाज बंद हो गया है। दूसरी तरफ सरकारी अस्पताल में पित्त, किडनी की पथरी, रसौली, मोतियाबिंद और बच्चेदानी के ऑपरेशन की सुविधा ही नहीं है। ऐसे में मरीजों की पीड़ा बढ़ने वाली है।
दरअसल, निजी अस्पतालों में जहां दूरबीन विधि से ये सारे ऑपरेशन आसानी से हो जाते हैं, वहीं सरकारी में चीरा लगाकर मरीजों का इलाज होता है।
सरकार के नए आदेश से जहां मरीजों की पीड़ा बढ़ेगी, वहीं निजी अस्पतालों में खुद के पैसे से इलाज कराने में सर्जरी भी 30 से 50 हजार रुपये तक होगी। जिले में 7.56 लाख मरीज आयुष्मान योजना के तहत कवर हैं। जिलेभर में आयुष्मान के तहत 18 अस्पतालों का सरकार के साथ अनुबंध था।
इन अस्पतालों में 50 से ज्यादा मरीजों के प्रतिदिन ऑपरेशन होते थे। जिले के सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद और बच्चेदानी का ऑपरेशन पहले से नहीं हो रहा था। इसके लिए मरीजों को पीजीआई रेफर किया जाता था।
निजी अस्पतालों में इन बीमारियों के ऑपरेशन बंद होने से नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ेगी और मरीजों को वेटिंग में रहकर इलाज करवाना पड़ेगा। इससे पहले उल्टी-दस्त और दमा का इलाज भी आयुष्मान में बंद हो गया है।