प्रधानमंत्री के नाम लिखे गए पत्र को दिखाते किसान व खाप प्रतिनिधि। संवाद
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जींद/उचाना/नरवाना। कृषि कानूनों के विरोध में एक महीने से दिल्ली सीमा पर किसान आंदोलन जारी है। वहीं पिछले पांच दिन से जिले के किसान बद्दोवाल और खटकड़ टोल पर डटे हैं। इस दौरान टोल फ्री करवाए गए हैं। मंगलवार को उचाना के किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी में मन की बात लिखकर कानून वापस लेने की मांग की है। किसानों ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह को भी पत्र लिखा है।
टोल के पास धरने पर बैठे किसानों ने फैसला लिया है कि क्षेत्र में 12 खाप पंचायत हैं। खाप प्रतिनिधि चिट्ठियां लिखेेंगे। सर्व जातीय दाडन खाप चबूतरा पालवां के महासचिव आजाद पालवां व सर्व जातीय खेड़ा खाप के प्रधान सतबीर पहलवान बरसोला ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के लोगों के साथ अपने मन की बात कह सकते हैं, लेकिन किसानों के मन की बात नहीं सुन रहे हैं। अब किसानों ने अपने मन की बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के लिए डाक का सहारा लिया है।
किसान आंदोलन बना जन आंदोलन : बूटर
कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर हाईवे पर खटकड़ गांव से आगे टोल प्लाजा पर किसानों का धरना जारी है। पंजाब में किसान संगठन के प्रधान हरभजन सिंह बूटर पटियाला ने कहा कि अब किसान आंदोलन जन आंदोलन बन चुका है। किसान आंदोलन में प्रदेश की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि सारी उम्र कोई सत्ता में नहीं रहता है। लोगों की आवाज भगवान की आवाज होती है। केंद्र सरकार को जल्द ही कृषि कानूनों को रद्द करना चाहिए।