07जेएनडी11: जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र । संवाद
जुलाना। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक उप जिला अस्पताल (एसडीएच) का दर्जा नहीं मिल पाया है।
सीएचसी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन सुविधाएं सीमित होने के कारण गंभीर मरीजों को जींद, रोहतक रेफर करना पड़ता है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। वहीं कई बार मरीजों की जान पर भी बन आती है। यदि जुलाना सीएचसी को एसडीएच में तब्दील कर दिया जाए तो यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती, आधुनिक जांच सुविधाएं और बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।
जुलाना सीएचसी में भवन, भूमि, मरीजों की ओपीडी, स्टाफ की संख्या सहित कई आवश्यक मापदंड पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। इसके बावजूद फाइलें कार्यालयों में घूम रही है और निर्णय नहीं हो पा रहा। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता के कारण मामला लटकता जा रहा है। मरीजों का कहना है कि जुलाना विधानसभा क्षेत्र की आबादी और मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को दूर रेफर किए जाने से उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार एंबुलेंस की उपलब्धता न होने से निजी साधनों से मरीजों को ले जाना पड़ता है। सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मांग की है कि जुलाना सीएचसी को जल्द से जल्द एसडीएच का दर्जा दिया जाए। इससे न केवल जुलाना कस्बे बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
वहीं भाजपा नेता कैप्टन योगेश बैरागी ने कहा कि यदि प्रक्रिया चल रही है तो मुख्यमंत्री से मिलकर जल्द से जल्द अस्पताल को एसडीएच में तबदील करवाया जाएगा जिससे क्षेत्र के लोगों को और सुविधा मिल सके।