नगर परिषद की चेयरपर्सन पूनम सैनी के खिलाफ विरोधी पार्षदों द्वारा दिए गए अविश्वास प्रस्ताव पर छह नवंबर को मतदान होना है। इसको लेकर चेयरपर्सन पूनम सैनी व विरोधी खेमा अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने में लगे हैं। हालांकि विरोधी खेमे से दो पार्षद चेयरपर्सन के खेमे में जा चुके हैं, लेकिन अभी भी विरोधी पक्ष को दो चेयरपर्सन पूनम सैनी के पक्ष के दो पार्षदों की सदस्यता रद्द होने की उम्मीद है। यदि ऐसा होता है तो पूरी बाजी पलट सकती है।
गौरतलब है कि 18 सितंबर को नगरपरिषद के 31 में से 21 पार्षदों ने शपथ पत्र देकर चेयरपर्सन पूनम सैनी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया था। इसके बाद दो पार्षद राममेहर व ज्योति कौशिक वापस चेयरपर्सन पूनम सैनी के पक्ष में आ चुके हैं। दो पार्षदों पर आरोप लगे हैं। इनमें एक पार्षद पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने व दूसरे पर नियमों के विरुद्ध प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के आरोप हैं। यह दोनों ही पार्षद चेयरपर्सन पूनम सैनी के खेमे में हैं। अब विरोधी पक्ष को उम्मीद है कि मतदान से पहले उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है। ऐसे में यदि दो पार्षदों की सदस्यता रद्द हुई तो फिर माहौल विरोधी खेमे के पक्ष में आ जाएगा।
बहुमत हमारे साथ
विरोधी खेमे ने सारे हथकंडे अपना लिए हैं। इसके बावजूद बहुमत हमारे साथ है। मतदान में यह साबित हो जाएगा।
पूनम सैनी, चेयरपर्सन, जींद नगर परिषद।
मीटिंग हुई तो चेयरपर्सन पास होगा अविश्वास प्रस्ताव
लगातार चार साल तक उपेक्षा का शिकार रहे पार्षदों ने चेयरपर्सन पूनम सैनी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया है। इस पर अब मतदान होना है। यदि मतदान होता है तो अविश्वास प्रस्ताव पक्का पास होगा और चेयरपर्सन को कुर्सी से हटना पड़ेगा।
प्रवीण बैनिवाल, पार्षद।