28जेएनडी30: यज्ञ हवन करते हुए आर्य समाज के सदस्य। स्रोत आर्य समाज
नरवाना। आर्य समाज नरवाना, संबद्ध आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा दयानंद मठ रोहतक के तत्वावधान में रविवार को पर्यावरण संरक्षण एवं शुद्धि के उद्देश्य से हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रधान चंद्रकांत आर्य के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। हवन-यज्ञ के साथ साप्ताहिक सत्संग भी आयोजित किया गया, जिसमें वैदिक परंपराओं और भारतीय संस्कृति पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
सत्संग के दौरान धर्मपाल, वेदपाल आर्य एवं डॉ. प्रताप सिंह ने भजन और गीतों के माध्यम से परमात्मा की भक्ति, आराधना और उपासना का संदेश दिया। प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान-विज्ञान और धर्म-कर्म आधारित रही है। उन्होंने बताया कि वर्ण व्यवस्था जन्म से नहीं, बल्कि कर्म के आधार पर निर्धारित की गई थी। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में संध्या, उपासना और योग साधना करने से मन, मस्तिष्क और शरीर का सर्वांगीण विकास होता है।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन, पहाड़, नदियों और खेतों का संरक्षण हमारी प्राचीन परंपरा रही है। आयुर्वेद और शास्त्र ग्रंथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए समाज को जागरूक करने का आधार रहे हैं। मिथिलेश शास्त्री ने कहा कि वैदिक शिक्षा मनुष्य निर्माण की सर्वोत्तम प्रणाली है। इस अवसर पर संजीव, यशपाल, रामकुमार, मीना गर्ग, कृष्ण और राजवीर शास्त्री सहित श्रद्धालु मौजूद रहे।