जींद। एडिशनल सेशन जज की अदालत ने डोडा पोस्त के नमूने लैब में देर से भेजने पर आरोपी को बरी कर दिया है। यह मामला वर्ष 2019 से विचाराधीन था।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार डिटेक्टिव स्टाफ की टीम 19 फरवरी 2019 को सूचना मिली थी कि मोहलखेड़ा निवासी गुरचरण सिंह मादम पदार्थ बेचता है। वह कार में भारी मात्रा में डोडा पोस्त लेकर गांव आएगा। इस पर टीम ने संगरूर नेशनल हाईवे स्थित मोहलखेड़ा रोड पर नाकाबंदी कर दी। कुछ ही देर बाद एक कार आती दिखाई दी। इसके रोककर चालक का नाम पूछा तो उसने मोहलखेड़ा निवासी गुरचरण सिंह बताया।
जब कार की तलाशी ली तो उसमें करीब 20 किलो डोडा पोस्त बरामद हुआ। सदर थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। पुलिस ने घटना के पांच दिन बाद नमूने जांच के लिए एफएसएल लैब भेजे। जब यह मामला अदालत में पहुंचा तो पुलिस से पूछा गया कि जांच के लिए नमूने पांच दिन बाद लैब क्यों भेजे जबकि नमूने भेजने का समय 72 घंटे होता है लेकिन नमूने भेजने में पुलिस ने लापरवाही की।
कहीं पुलिस ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ तो नहीं की। इसी बात को लेकर एडिशनल सेशन जज शिफा की अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया है।