जींद। मुख्य न्यायाधीश दंडाधिकारी की अदालत ने जींद की रानी इंद्रजीत कौर के खिलाफ धोखाधड़ी मामले में आठ जनवरी को समन जारी किया है। यह मामला एक ही प्लाट को दो लोगों को बेचने का है। मामला 24 साल पुराना है। मामले के उजागर होने से जींद का राजघराना विवादों में आ गया है।
मूलरूप से मांडी कलां गांव के रहने वाले गोपी राम ने अदालत में दायर की याचिका में बताया कि उसने एक दिसंबर 2001 को रानी इंद्रजीत कौर से अमरहेड़ी गांव स्थित करीब 240 वर्ग गज का प्लाट 33600 रुपये में खरीदा था। उन्होंने बताया कि इसके लिए रानी इंद्रजीत कौर ने इकरारनामा किया था।
उन्होंने कहा था कि जल्दी ही वह रजिस्ट्री करवा देंगी लेकिन उसके बार-बार कहने पर भी रजिस्ट्री नहीं करवाई। उन्होंने कहा कि वह बिना किसी संकोच के वहां पर मकान बनाकर रह सकता है। इंद्रजीत कौर ने कहा था कि वह राजा के परिवार से हैं। इसलिए कोई धोखाधड़ी नहीं होगी। इसके बाद उसने वहां मकान बना लिया और रहने लगा।
वर्ष 2019 में रानी इंद्रजीत कौर ने कहा कि यदि रजिस्ट्री करवानी है तो इकरारनामा और 65 हजार रुपये, रजिस्ट्री खर्चा दे दो, प्लाट की रजिस्ट्री करवा देंगे। इसके बाद गोपीराम ने असल इकरारनामा और 65 हजार रुपये रानी इंद्रजीत कौर को दे दिए। दो अगस्त 2019 को उसे पता चला कि इस 240 वर्ग गज में से 90 वर्ग गज का प्लॉट रानी इंद्रजीत कौर ने सुनीता पत्नी राजेश को बेच दिया है।
जब वह इस बात को लेकर रानी से मिले तो उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उसके बार-बार पूछने पर रानी इंद्रजीत कौर गाली गलौज तथा हाथापाई पर उतर आईं। धमकी दी कि यदि भविष्य में कोठी के आसपास भी नजर आए तो वह जान से मरवा देगी। तीन अगस्त को उसने थाना सदर जींद में शिकायत दी लेकिन थाना पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की।
इसके बाद उसने वकील के माध्यम से जींद अदालत में याचिका दायर की। अदालत में छह साल से ज्यादा की लड़ाई के बाद अब मुख्य न्यायाधीश दंडाधिकारी जसबीर की अदालत ने रानी इंद्रजीत कौर को 29 मई को अदालत में तलब किया है।