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पढ़ाई छोड़ चुके 427 विद्यार्थियों का दोबारा स्कूल में दाखिले दिलवाएंगे शिक्षक, एकत्रित किया डाटा

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पढ़ाई छोड़ चुके विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले दोबारा स्कूल में लाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है।
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हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से कोविड-19 या अन्य किसी कारण से स्कूलों से दूर हुए विद्यार्थियों का दोबारा दाखिला करवाने के लिए जिलेभर में सर्वे किया गया। 427 ऐसे विद्यार्थियों का डाटा तैयार किया गया है, जो अलग-अलग कारणों से स्कूल छोड़ चुके हैं। सर्वे के दौरान ऐसे विद्यार्थियों के अभिभावकों को अपने बच्चों का दाखिला दोबारा से करवाने के लिए राजी भी किया गया। अब इन सभी विद्यार्थियों का आगामी शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही दाखिला करवाने के लिए शिक्षा विभाग प्रयासरत रहेगा। शिक्षकों की ओर से करीब 20 दिन लगाकर इस सर्वे को पूरा किया गया है। 25 से कम छात्र संख्या होने के कारण जिलेभर के 20 स्कूलों पर मर्ज होने की तलवार लटक रही है। ऐसे में यह सर्वे उन स्कूलों के लिए संजीवनी बूटी का काम कर सकता है, जहां पर छात्रों की संख्या 20 से कम है। इस सर्वे में पांच से अधिक विद्यार्थी उस स्कूल के क्षेत्र के आसपास के निकलकर सामने आए हैं जिन पर मर्ज होने की तलवार लटक रही है। ऐसे में अगर इन विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने में शिक्षक कामयाब रहे तो वह स्कूल भी बंद होने से बच सकते हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम है।
जींद ब्लॉक में सबसे अधिक ड्राप आउट विद्यार्थी
जिले में 427 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने कोविड-19 या किसी अन्य कारण से पढ़ाई को बीच में छोड़ दी है। इसमें से जींद ब्लॉक में सबसे अधिक 138 ऐसे विद्यार्थी हैं, जो ड्राप आउट हैं। इसके बाद उचाना ब्लॉक में 108 विद्यार्थियों ने किसी न किसी कारण से पढ़ाई छोड़ दी है। नरवाना में 59, अलेवा में 45, सफीदों में 37, पिल्लूखेड़ा में 21 व जुलाना ब्लॉक में 19 ड्राप आउट विद्यार्थी हैं, जिन्हें शिक्षा विभाग अगले सत्र से दाखिला दिलवाने का प्रयास करेगा।
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ड्राप आउट विद्यार्थियों को दोबारा से दाखिला दिलवाने का प्रयास
जिले में 427 ऐसे विद्यार्थी हैं जो किसी न किसी कारण से स्कूल छोड़ चुके हैं। शिक्षकों का प्रयास रहेगा कि इन विद्यार्थियों को अगले सत्र में दाखिला दिलवाया जाए। सर्वे के दौरान अभिभावकों को समझाया गया था कि विद्यार्थियों को दोबारा से पढ़ाई शुरू करवाएं। अगर विद्यार्थी शिक्षित होगा तो वह आगे चलकर कामयाब हो सकता है। ज्यादातर अभिभावकों ने भी अपने बच्चों को अगले सत्र से दाखिला दिलवाने पर सहमति जताई है।
सरताज सिंह, एपीसी, जिला समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय जींद।
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