जींद। शहर की प्रसिद्ध शिक्षण संस्था एसडी स्कूल के अध्यापकों ने सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी मदन चोपड़ा से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने उसे बिना नोटिस दिए नौकरी से निकला दिया। शिक्षकों का कहना है कि वह पिछले पांच साल से लगातार स्कूल में अध्यापन कार्य में जुटे हैं। कोरोना काल में उन्होंने आधे वेतन के साथ ऑनलाइन पढ़ाई को सुचारु रखा, इसके बावजूद उन्हें हटा दिया गया, जो गलत है।
पीजीटी गणित अध्यापक प्रदीप कुमार, टीजीटी गणित नीलम, पीजीटी हिंदी पूजा, टीजीटी एसओएस ज्योति शर्मा, पीजीटी हिंदी रानी देवी, शीलवंती, संतोष रानी, किरण देवी, क्लर्क सीमा व पीआरटी सोमवती देवी ने बताया कि उनका कार्य पूरी तरह से संतोषजनक है। मैनेजमेंट और विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य के दौरान कोई दिक्कत नहीं आने दी। नीलम ने कहा कि सभी अध्यापकों को मैनेजमेंट द्वारा प्रस्ताव पारित करके एक जनवरी 2019 को नियमित कर दिया था। इस दौरान अध्यापकों ने बार-बार मैनेजमेंट से ज्वाइनिंग लेटर की मांग की जाती रही, लेकिन हर बार आना-कानी की जाती रही। अब उन्हें बिना नोटिस और बिना कुछ कारण के उन्हें अध्यापन के कार्य से रिलीव कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2020 में कोविड-19 के कारण नियमित कक्षाएं बंद हो गई थी, परंतु सरकार के निर्देशानुसार उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई को सुचारु रखा। अब मैनेजमेंट के पूर्व प्रधान लक्ष्मीनारायण की मौत के बाद मैनेजमेंट द्वारा बेवजह नौकरी से निकाल दिया है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की कि इस मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें बहाल करवाया जाए और बकाया वेतन दिलाया जाए।
मामले में जो भी उचित कार्रवाई होगी की जाएगी : डीईओ
एसडी स्कूल के अध्यापकों द्वारा उन्हें बेवजह रिलीव किए जाने की शिकायत मिली है। अध्यापकों से भी इस बारे में बात हुई है। इस मामले में जो भी उचित कार्रवाई होगी वह की जाएगी। - मदन सिंह चोपड़ा, जिला शिक्षा अधिकारी
स्कूल में छात्र संख्या चार हजार से घटकर दो हजार रह गई है। कोरोना की वजह से काफी विद्यार्थियों की फीस भी नहीं आई। संस्था घाटे में है। स्टाफ का महीने का वेतन 12 लाख रुपये बनता है। जबकि फीस दो लाख रुपये जमा होती है। ऐसे में जितने स्टाफ की जरूरत है, उतना ही रखा जाएगा। संस्था कोई नई भर्ती नहीं कर रही है। अगर नई भर्ती होगी, तो हटाए गए कर्मचारियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। - श्यामलाल बसंल, कार्यकारी प्रधान।