फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा परीक्षण से ही संभव है टिकाऊ खेती : डॉ. धीरज पंघाल

Mon, 11 May 2026 01:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
विज्ञापन
10जेएनडी13: कृषि विज्ञान केंद्र प्र​शिक्षण में मौजूद किसान। स्रोत आयोजक
विज्ञापन
जींद। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र जींद की ओर से किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से अभियान चलाया गया। यहां संतुलित उर्वरकों के उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण विषय पर आयोजित कार्यक्रम का सफल संचालन जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. धीरज पंघाल ने किया।
विज्ञापन

कार्यक्रम में डॉ. धीरज पंघाल ने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केवल नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। फॉस्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपेक्षा करने से मिट्टी का रासायनिक संतुलन बिगड़ जाता है।
इससे लंबी अवधि में उत्पादन क्षमता घटने लगती है। डॉ. पंघाल ने जोर देकर कहा कि मिट्टी की जांच करवाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि किसान हर तीन साल में कम से कम एक बार अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण अवश्य करवाएं।
विज्ञापन

मृदा परीक्षण के आधार पर खाद डालने से अनावश्यक खर्च बचता है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है। इस कार्ड के माध्यम से किसानों को उनकी भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की सटीक रिपोर्ट दी जाती है जिससे वैज्ञानिक खाद प्रबंधन आसान हो जाता है।
विशेषज्ञ ने कहा कि केवल रसायनों पर निर्भरता उचित नहीं है। उन्होंने किसानों से गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया। जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है और लाभकारी सूक्ष्म जीव सक्रिय रहते हैं। अंत में किसानों की शंकाओं का समाधान किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें