जींद। आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकीं सुशीला जांगड़ा ने मेहनत, लगन के बल पर न केवल परिवार को संभाला बल्कि सैकड़ों युवतियों को हुनरमंद बनाकर उनके जीवन की दिशा भी बदल दी है।
बैंक रोड पर सात वर्षों से वह अपना सिलाई सेंटर चला रही हैं। जहां आसपास के क्षेत्रों की लड़कियां और महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। सुशीला जांगड़ा का सफर आसान नहीं रहा। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने सेवा भारती से सिलाई सिखाना शुरू किया।
वहीं से उनके भीतर यह विश्वास जगा कि यदि महिलाओं को हुनर मिल जाए तो वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने बैंक रोड पर अपना स्वयं का सिलाई सेंटर स्थापित किया जो आज महिलाओं के सशक्तीकरण का केंद्र बन चुका है। 26 वर्षों में सुशीला जांगड़ा सैंकड़ों लड़कियों को सिलाई का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
प्रशिक्षण के बाद कई युवतियां घर से ही सिलाई का काम कर रही हैं तो कुछ ने बड़े स्तर पर अपने स्वयं के सिलाई केंद्र भी शुरू कर दिए हैं। सुशीला का मानना है कि आर्थिक स्वतंत्रता से ही महिला का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह समाज में सम्मान के साथ जीवन जी पाती है।
तीन बच्चों की मां सुशीला जांगड़ा बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और अन्य आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर रही हैं। वह कहती हैं कि आत्मनिर्भर बनने से न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ती है।
आज सुशीला जांगड़ा न केवल अपने क्षेत्र में एक पहचान बना चुकी हैं बल्कि वह उन महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं जो संसाधनों की कमी के कारण सपनों को साकार करना छोड़ देती हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी महिला आत्मनिर्भर बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।