10जेएनडी04-क्लास रेडीनेस प्रोग्राम के तहत रानी तालाब पर शैक्षणिक भ्रमण करने पहुंचे विद्यार्थी औ
जींद। राजकीय स्कूलों में क्लास रेडीनेस कार्यक्रम के तहत चल रही गतिविधियों का शिक्षकों को रिकॉर्ड रखना होगा। वहीं कक्षाओं में प्रिंट रीच और टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) गतिविधियों का अवलोकन करना होगा। पिछले दिनों एडीसी विवेक आर्य की अध्यक्षता में क्लास रेडीनेस कार्यक्रम की समीक्षा को लेकर लघु सचिवालय परिसर के सभागार में बैठक हुई। इसमें जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों को क्लास रेडीनेस कार्यक्रम के तहत चल रही गतिविधियों और कक्षा अवलोकन का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए हैं।
नई राष्ट्रीय शिक्षण नीति के तहत शिक्षा विभाग बच्चों को 42 दिवसीय क्लास रेडीनेस कार्यक्रम के जरिए खेल-खेल में प्रभावशाली शिक्षण गतिविधियां कराई जा रहीं हैं। इसमें बालवाटिका से लेकर पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थी भाग ले रहे हैँ। यह कार्यक्रम 23 मई तक चलेगा। इस दौरान शिक्षक विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधि आधारित भाषा और अंक दक्षता के बारे में जानकारी देंगे। शिक्षक रोजाना खेल-खेल में कविता गान, कहानी सुनाना, मिट्टी पर उंगलियों से आकृति बनाकर बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके साथ बच्चों को रस्सी कूदना भी सिखाया जाएगा। विद्यालय में बच्चों से सीखी गई गतिविधियों के बारे में पूछा जाएगा। कार्यक्रम के अंतिम सप्ताह में अभिभावकों की बैठक लेकर उन्हें बच्चों की प्रगति की जानकारी दी जाएगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पहली कक्षा में आने से पहले उनके बुनियादी कौशल विकसित करना और उन्हें स्कूल के वातावरण में सहज बनाना है। क्लास रेडीनेस प्रोग्राम कार्यक्रम बच्चों में साक्षरता, पढ़ने और लिखने की क्षमता, गणित, संख्याओं और गणना की समझ, सामाजिक और भावनात्मक कौशल का विकास करता है। यह कार्यक्रम बच्चों को खेल-खेल में सीखने के तरीके सिखाता है ताकि वे स्कूल के माहौल से सहज हो सकें और किसी भी तरह का डर या संकोच नहीं हो। क्लास रेडीनेस प्रोग्राम के अवलोकन के लिए सभी एबीआरसी, बीआरपी, सीआरसी और खंड शिक्षा अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने खंड के सभी क्लस्टर के सभी प्राथमिक विद्यालयों का अवलोकन करें।
क्लास रेडीनेस के तहत चल रही विभिन्न गतिविधियों और अवलोकन का रिकॉर्ड शिक्षकों को रखना होगा। बाल मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से 80 प्रतिशत दिमाग का विकास छह वर्ष की आयु तक हो जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों का सीखने का आधार विकसित करना बहुत जरूरी है। इसका उद्देश्य बच्चों का हुनर निखारना है। इसमें अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
राजेश वशिष्ठ, एफएलएन जिला समन्वयक।