नंदीशाला की बदहाल व्यवस्थाओं की जांच करने के लिए एसडीएम सत्यवान मान ने शुक्रवार को जयंती देवी मंदिर के सामने बनी नंदीशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान जयति-जयति हिंदू महान संगठन के गोभक्तों ने प्रशासन को घेरते हुए कहा कि उन्हें पाप का भागी बनाया जा रहा है।
उन्होेंने कहा कि तीन साल पहले जब नंदीशाला में गोवंश को रखा गया था तब प्रशासन ने कहा था कि गोवंश के लिए सरकार से मदद मिलेगी, लेकिन यहां गोवंश भूख व प्यास से मर रहे हैं। इस पर एसडीएम ने कहा कि सरकार द्वारा नंदीशाला के लिए कोई पैसा नहीं भेजा गया है, ऐसा मत समझो की पैसा खाए हैं। इस पर नंदीशाला कमेटी के सचिव जयभगवान ने माना कि तीन साल में नंदीशाला में चारे के लिए सरकार से 47 लाख रुपये मिले हैं, जो नाकाफी हैं। नंदीशाला की व्यवस्थाओं को लेकर संचालन कमेटी व गोभक्तों के बीच तीखी बहस भी हुई। ऐसे में एसडीएम की मौजूदगी में तय हुआ कि शनिवार को जिला प्रशासन, गोभक्त, संचालन समिति व अन्य संस्थाओं की मीटिंग बुलाई जाएगी, जिसमें व्यवस्था सुधारने के लिए योजना बनेगी।
वीरवार को जयति-जयति हिंदू महान संगठन के सदस्यों ने नंदीशाला का दौरा कर यहां की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे। जिसका संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को नंदीशाला में ही मीटिंग करने का फैसला लिया और एसडीएम नंदीशाला पहुंचे। मीटिंग में संचालन समिति के सदस्य, गोभक्त व कई संस्थाओं के पदाधिकारियों के साथ कुछ गांवों के सरपंच भी पहुंचे। संगठन के प्रमुख अतुल प्रताप चौहान ने कहा कि नंदीशाला की व्यवस्थाएं यहां मौजूद गोवंश को मारने के लिए बनाई गई हैं। इस पर नंदीशाला संचालन समिति के सचिव जयभगवान व अन्य लोगों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। समिति के लोग समाज से चंदा व चारा एकत्रित कर नंदीशाला चला रहे हैं। इस दौरानों दोनों पक्षों में जमकर बहस हुई। गोभक्तों ने कहा कि प्रशासन की पहल पर उन्होंने शहर के लावारिस गोवंश को तीन साल पहले नंदीशाला में पहुंचाया था। अब यहां व्यवस्था ऐसी है कि गोवंश भूख व प्यास से मर रहे हैं। इससे वे भी पाप के भागीदार बन रहे हैं। इन लोगों ने आरोप लगाया कि तीन साल पहले यहां चार हजार गोवंश को रखा गया था, लेकिन अब 800 ही बचे हैं। बाकी गोवंश कहां गए इसका जवाब चाहिए।
न चारा, न पानी, न दवा कैसी नंदीशाला
गोसेवक अतुल प्रताप चौहान ने कहा कि नंदीशाला में चारा, पानी और दवा की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में नंदीशाला चलाने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
लाख टके के सवाल पर नहीं मिला जवाब
जिस समय मीटिंग में गोभक्त नंदीशाला की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे थे तभी एसडीएम व नंदीशाला संचालन समिति के सदस्य उनसे बहस करने लगे। इस दौरान अतुल प्रताप चौहान ने कहा कि उन्होंने तीन दिन पहले एक बैल का फोटो लिया था, जिसका सींग टूटा हुआ था। आज वह बैल नंदीशाला में नहीं है। इस पर प्रशासन व संचालन समिति के लोग कोई जवाब नहीं दे पाए।
एसडीएम के आने की तैयारियों में हुई व्यवस्थाएं
इन लोगों ने कहा कि शुक्रवार को प्रशासन की ओर से यहां निरीक्षण का कार्यक्रम बनने के बाद कुछ व्यवस्थाएं हुई हैं। इसके तहत टैंक में ताजा पानी भरा गया है। गोभक्तों ने वीरवार को इसी टैंक के लिए गए फोटो भी एसडीएम सत्यवान मान को दिखाए, जिसमें गंदा पानी भरा हुआ है। वहीं गोवंश के लिए चारा भी डाला गया है, जबकि वीरवार को चारे की व्यवस्था नहीं थी।
शहर में अभी भी तीन हजार से अधिक गोवंश सड़कों पर
बेशक प्रशासन ने गोवंश के लिए दो-दो नंदीशाला की व्यवस्था की है, लेकिन अभी भी तीन हजार से अधिक गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
व्यवस्था सुधारने के लिए है अभियान
हमारा अभियान किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, नंदीशाला की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए है। प्रशासन ने शनिवार को मीटिंग कर इस पर योजना बनाने का फैसला लिया है। यदि व्यवस्था नहीं सुधरती तो अभियान जारी रहेगा।
अतुल प्रताप चौहान, प्रमुख जयति-जयति हिंदू महान संगठन।
नंदीशाला में व्यवस्थाएं देखी हैं। इस प्रकार की व्यवस्थाएं लगातार चलने वाली होती हैं और इनमें लगातार सुधार की संभावना रहती है। इसको लेकर कई संगठनों के साथ मीटिंग कर व्यवस्था ओर बेहतर बनाने की योजना बनाई जाएगी।
सत्यवान मान, एसडीएम।