06जेएनडी14: ट्रैक पर दौड़ते हुए तमन्ना। स्रोत: परिजन
जींद। बिशनपुरा गांव के किसान नरेंद्र अहलावत की बेटी तमन्ना ने हौसले से साबित कर दिया कि सपनों की उड़ान के लिए मजबूत इरादे ही काफी होते हैं। हर दिन दो से तीन घंटे की कड़ी मेहनत, पिता का साथ और खुद पर अटूट विश्वास के दम पर तमन्ना ने संघर्ष को अपनी ताकत बना लिया।
तमन्ना ने महज तीन साल के अभ्यास में राष्ट्रीय स्तर पर छह पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इनमें एक स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। अब तमन्ना का लक्ष्य 400 मीटर दौड़ में एशियन गेम्स और ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
दिलचस्प बात यह है कि तमन्ना ने शुरुआत हैंडबॉल खिलाड़ी के रूप में की थी और 10वीं तक उसी में सक्रिय रहीं। बाद में उन्होंने 400 मीटर दौड़ को अपना लक्ष्य बनाया और अपनी पहचान बनाई।
हिंदू कन्या कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा तमन्ना ने कॉलेज और राज्य स्तर पर कई पदक जीते हैं। 2025 में उत्तराखंड में आयोजित नेशनल गेम्स में उन्होंने 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया जबकि भुवनेश्वर में आयोजित जूनियर नेशनल में स्वर्ण पदक जीतकर सबको चौंका दिया।
तमन्ना की सफलता के पीछे उनके पिता का बड़ा योगदान है जो आर्थिक रूप से मजबूत न होने के बावजूद हर कदम पर बेटी के साथ खड़े रहे। अब तमन्ना कोचिंग अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं और अभ्यास कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं।