जींद। जिले में अस्थमा के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 मरीज अस्थमा के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं जबकि सालभर में इनकी संख्या करीब छह हजार तक पहुंच जाती है। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर बीमारी की पहचान, सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव से अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है।
नागरिक अस्पताल की फिजिशियन डॉ. विनिता ने बताया कि अस्थमा एक श्वसन संबंधी बीमारी है जो फेफड़ों को प्रभावित करती है। इसमें मरीज को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न और लगातार खांसी जैसी समस्याएं होती हैं। उन्होंने कहा कि धूल, धुआं, प्रदूषण, पराग कण, ठंडी हवा और धूम्रपान इसके प्रमुख कारण हैं। बदलते मौसम में अस्थमा के मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है।
डॉ. विनिता ने बताया कि अस्थमा के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज कराना चाहिए। जागरूकता और सावधानी से अस्थमा पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि शुरूआत में बीमारी आसानी से ठीक हो जाती है। बाद में मरीजों को ज्यादा परेशानी होती है। हर मरीज को धूल, धूएं व धूम्रपान से परहेज करने चाहिएं। बचाव ही इस बीमारी का सबसे प्रभावी उपाय है।
साफ-सफाई, संतुलित जीवनशैली और नियमित व्यायाम से फेफड़ों की क्षमता मजबूत की जा सकती है। डॉ. विनिता ने अपील की है कि लोग अस्थमा के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर उपचार लेकर अपनी सेहत का ध्यान रखें।
अस्थमा के मरीजों को दी जाती हैं इनहेलर और नेबुलाइजर
अस्थमा के मरीजों को मुख्य रूप से इनहेलर और नेबुलाइजर के जरिए दवाएं दी जाती हैं। इनमें ब्रोंकोडायलेटर दवाएं सांस की नलियों को खोलने में मदद करती हैं जबकि स्टेरॉयड आधारित इनहेलर सूजन को कम करते हैं। जरूरत पड़ने पर एंटी-एलर्जिक दवाएं भी दी जाती हैं।
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अस्थमा के लक्षण
सांस लेने में तकलीफ
सीने में जकड़न
लगातार खांसी
खांसी के साथ सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना
थकान और बेचैनी
अस्थमा से बचाव के उपाय
धूल और धुएं से दूरी बनाए रखें
बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें
घर में नियमित साफ-सफाई रखें
ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करें
धूम्रपान न करें और धूम्रपान करने वालों से दूरी रखें
एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से बचें
नियमित व्यायाम और योग करें