करेंसी संकट के कारण अब लोगों के व्यवसाय भी ठप पड़ने लगे हैं। इसका असर जींद के ट्रांसपोर्ट कारोबार पर पड़ रहा है। हालत यह है कि गाड़ी मालिकों के पास चालकों को रास्ते के खर्च के लिए देने तक के पैसे नहीं हैं। वहीं रविवार को बैंकों की छुट्टी होने के कारण लोगों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। रविवार को जहां बैंक बंद रहे, वहीं एटीएम भी खाली रहे। इससे घंटों तक लोग एटीएम के बाहर कैश आने का इंतजार करते रहे और फिर खाली हाथ ही घरों को लौट गए। अब सोमवार को बैंक खुलने से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। जींद ट्रक यूनियन में करीब 200 ट्रक पंजीकृत हैं। जींद से अधिकतर ट्रकों में भैंस भरकर साउथ लाइन पर भेजा जाता है। इसमें मुंबई, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु मुख्य केंद्र हैं, लेकिन पिछले एक सप्ताह से गाड़ियां नहीं जा रही हैं। गाड़ी मालिकों का कहना है कि जाते वक्त चालक को करीब 15 हजार रुपये एडवांस देने पड़ते हैं। इसमें रास्ते के खर्च और खाने का खर्च होता, लेकिन अब सबसे अधिक दिक्कत चालकों को खाने की आ रही है। डीजल के लिए तो पुरानी करेंसी से भी काम चल जाता है, लेकिन ढाबों पर छोटे नोट ही लिए जा रहे हैं। ऐसे में चालकों को भेजना संभव नहीं हो पा रहा है। जींद की प्रतिदिन 20 गाड़ियों की लोडिंग होती थी, लेकिन अब यह एक से दो गाड़ी ही रह गई हैं।
वापसी का नहीं मिलता माल
जींद से दक्षिण भारत को जाने वाली गाड़ियां आते वक्त फल और सब्जियां भरकर लाती है, लेकिन करेंसी संकट के चलते यह भी संभव नहीं हो रहा है। आते वक्त गाड़ी को पहले के मुकाबले 20 से 30 हजार रुपये कम मिलते हैं। इससे बचत नहीं हो पाती और मालिक गाड़ियों को नहीं भेज रहे हैं।
लोकल माल की भी नहीं हो रही ढुलाई
बाहर का ही नहीं लोकल माल की ढुलाई भी गाड़ियां नहीं कर पा रही हैं। ट्रक यूनियन के प्रधान सतबीर सिंह के अनुसार फिलहाल रेलवे स्टेशन पर यूरिया का रैक आया है, लेकिन यहां भी काम नहीं हो पा रहा है। गाड़ी लोडिंग और अनलोडिंग के लिए मजदूर खुले पैसे मांगते हैं, जो मालिकों के पास नहीं हैं। एक दिन में 24 हजार रुपये तक निकलवाने की सीमा है। इससे एक दिन का भी काम नहीं चल सकता।
गाड़ियों को नहीं मिल रहे टायर
सिर्फ माल भाड़े की ही नहीं, हर प्रकार की दिक्कत आ रही है। यूनियन मेें करीब 20 ऐसी गाड़ियां खड़ी हैं, जिनको टायर की जरूरत है, लेकिन टायर के लिए नकदी की जरूरत है और यह उपलब्ध नहीं है। इससे व्यापार चौपट हो गया है।
- सतबीर सिंह, प्रधान ट्रक यूनियन
फसल की नहीं हो रही पेमेंट, पुराने नोटों से नहीं मिल रहा खाद बीज
उचाना। नोट बंदी की मार किसानों को खूब झेलनी पड़ रही है। इस समय गेहूं की बिजाई को लेकर किसानों को खाद-बीज खरीद को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान अब दो पाटों के बीच पिस रहे हैं। एक ओर तो किसानों को मंडी से बेची फसल का भुगतान नहीं हो रहा है, वहीं निजी दुकानदारों से पुराने नोटों में खाद बीज नहीं मिल रहा है। वहीं सरकार दुकानों के बाहर लंबी लाइन लग रही है। इससे किसानों के लिए आफत बनी हुई है। किसान आढ़तियों के यहां नगदी लेने आ रहे हैं, लेकिन नई करेंसी की अभी समस्या के चलते किसानों को नई करेंसी आढ़ती नहीं दे पा रहे हैं। आढ़तियों की पर्चियों पर किसान गेहूं के बीज, खाद की खरीद कर रहे हैं। किसान अजमेर, शीशपाल, बलदेवा, सतपाल ने कहा कि जो करेंसी चेंज करवाने को लेकर किसान परेशान चल रहे हैं। आढ़तियों के यहां नगदी लेने जाते हैं तो वहां नई करेंसी नहीं मिलने से बाजार से सामान की खरीद नहीं कर पा रहे हैं। आढ़तियों की पर्चियों के सहारे बाजार से सामान ले रहे हैं। इन दिनों गेहूं की बिजाई देखते हुए किसानों की करेंसी चेंज करवाने की लिमिट बढ़ानी चाहिए। बैंकों में किसानों को खाद, बीज उपलब्ध करवाए जाए ताकि किसान वहां से बीज, खाद ले सकेें। दुकानदारों को अगर पुराने नोट दिए जाते हैं तो वह लेने से साफ मना कर देते हैं।
फेंकें नहीं गोशाला में दान दें पुराने नोट
सफीदों। श्री गोशाला प्रबंधक कमेटी ने आह्वान किया है कि पुराने नोट फेंकने और जलाने के समाचार आ रहे हैं। रमेश जैन ने कहा कि सफीदों के अलावा देश की अधिकतर गोशालाएं लोगों के सहयोग और दान-चंदे से चल रही हैं। गो माता बहुत की उपकारी है। उन्होंने सामर्थ्यवान लोगों से अपील की कि वे अपने धन को जलाने व फेंकने की बजाए गोशाला में देकर पुण्य करें।