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सामाजिक संगठनों ने किया प्रदर्शन

Sun, 21 Sep 2014 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद
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शहर की सड़कों पर बढ़ रही लावारिस गाय व बैलों की संख्या बढ़ने से परेशान लोगों ने शनिवार को शहर में प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने दुकानदारों से भी इस मुहिम में जुड़ने का आह्वान किया। लोगों ने पटियाला चौक से रोष प्रदर्शन करते हुए शिव चौक, तांगा चौक, सिटी थाना होते हुए मॉडल टाउन पहुंचे।

 इस दौरान दुकानदारों को बताया कि किस तरह प्रशासन माननीय कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहा है। इस अवसर पर दरवेश रेढू ने कहा कि हरियाणा नगर पालिका एक्ट (लावारिस पशुओं को पंजीकरण व उचित नियंत्रण उपविधिया 2006) के तहत लावारिस पशुओं को रोकने के लिए एक यार्ड होना चाहिए, ताकि लावारिस पशु आम जनता को नुक्सान न पहुंचा सके व शहर में गंदगी न फैला सके, लेकिन शहर में नगर परिषद ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कर रखी है।
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 अन्ना टीम के संयोजक हितेश हिंदुस्तानी ने कहा की सड़कों पर बढ़ी बेसहारा गाय व बैलों की संख्या के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं व कभी भी शहर की सड़कों पर सांडों को लड़ते देखा जा सकता है, लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा जो निंदनीय है। इस अवसर पर नरेश दुर्गा कालोनी, सूरजमल चहल ,राजपाल रेढू, कथुरा अहिरका, महिपाल कटारिया, मनीश अलेवा, विकास किनाना, राजकुमार, अनिल शर्मा, रमेश बरसोला, सोनू, संदीप छापड़ा, महेश शर्मा, नीतिन,  संजय तिरगाधारी, दीपक भारतीय मौजूद थे।
गायों की समस्या से संबंधित मुख्य बातें
1. 23 अगस्त 2013 को अन्ना टीम के आह्वान पर सामाजिक संगठनों के सहयोग से शहर लावारिस गाय  व बैलों को रानी तालाब में एकत्रित किया गया था। इसके बाद शहर की सड़कों से गायों को हटा दिया था।
2. पांच सितंबर 2013 को डीसी के समक्ष हुए गो-भक्तों व गोशाला प्रबंधकों की बैठक में गोशाला, भिवानी रोड ने पूरे जिले की लावारिस गाय को देशी नस्ल के बैलों को अपनी गोशाला में रखने पर सहमती दी थी जिसके बाद लगभग 300 गाय व नंदियों को श्री गोशाला छोड़ा गया, लेकिन कुछ समय बाद नंदी गोशाला से बाहर आ गये जिसपर गौभक्तों ने तत्कालीन एसडीएम अमृता सिवाच को गौशाला की जांच के लिए ज्ञापन दिया था लेकिन आज तक कोई जांच नहीं हुई।  
3. 14 मार्च 2014 को अन्ना टीम के केस की सुनाई करते हुए माननीय कोर्ट में नगर पालिका के अधिकारिओं ने लिखित आश्वासन दिया था की 15 दिन में शहर के लावारिस गाय व नंदियों को सुरक्षित स्थान पर छुड़वा दिया जाएगा व ऐसा अभियान हर 15 दिन में चलता रहेगा, लेकिन छह माह हो जाने के बाद भी आज तक कोई उचित कदम नहीं उठाए गए हैं।
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4. नौ सितंबर 2014 को अन्ना टीम ने दोबारा जन अदालत में केस किया। जिसकी 19 सितंबर सुनवाई के दौरान नगर परिषद ने 17 अक्तूबर तक जवाब देने के लिए समय मांगा है।

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