जींद। रोहतक रोड निवासी अंगूरी और बेटी स्नेहा ने घर में एक औषधीय बगीचा बनाया है। इसमें 60 से अधिक औषधीय और दूसरे पौधे लगाकर न केवल देखभाल कर रही हैं बल्कि उनसे दवाइयां बनाकर लोगों को लाभ भी पहुंचा रही हैं।
अंगूरी पेशे से अध्यापिका हैं। उनको वर्षों से औषधीय पौधों का शौक रहा है। करीब 10 साल पहले उन्होंने घर में पौधे लगाने शुरू किए जो आज बगीचे का रूप ले चुका है। बेटी स्नेहा, जो आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं अब इन पौधों का उपयोग कर विभिन्न बीमारियों के लिए औषधियां तैयार कर रही हैं। क्लीनिक में भी उनका प्रयोग करती हैं।
घर में तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, अश्वगंधा, आंवला, नीम, पुदीना, लेमनग्रास, अदरक, हल्दी, ब्राह्मी, शतावरी, अजवाइन, कड़ी पत्ता, गुड़हल, पथरीचूर, सेंधा पत्ता, अर्जुन, बेल, कालमेघ जैसे करीब 30 प्रमुख औषधीय पौधे शामिल हैं। इन पौधों से काढ़ा, जूस, लेप और चूर्ण तैयार किए जाते हैं, जो सर्दी-जुकाम, पाचन समस्या, त्वचा रोग, इम्यूनिटी बढ़ाने और तनाव कम करने में सहायक हैं।
स्नेहा बताती हैं कि गिलोय और तुलसी का काढ़ा इम्यूनिटी(रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाता है। एलोवेरा त्वचा के लिए लाभकारी है जबकि अश्वगंधा तनाव कम करने में मदद करती है। वहीं आंवला और बेल पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं।
बच्चों को पौधों के महत्व बताती हैं अंगूरी
अंगूरी स्कूल में भी बच्चों को पौधों के महत्व बताती हैं, ताकि नई पीढ़ी आयुर्वेद और प्रकृति के प्रति जुड़ाव महसूस करे। मां-बेटी की मेहनत पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है।
05जेएनडी32: डॉ. स्नेहा घर में लगाए पौधों की देखभाल करते हुए। संवाद